बाराबंकी। सड़क हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं, लेकिन रोडवेज बसों की दशा सुधारने की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। खासकर ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसें खड़खड़ा रही हैं। सीटें खस्ताहाल हैं। फ्रंट और बैक मिरर तक गड़बड़ हैं। कुछ बसों मेें जीपीएस और स्पीड गवर्नर भी नहीं लगे हैं। आवागमन के लिए बसों पर निर्भर यात्री ये सब सहते हुए यात्रा करने को मजबूर हैं।
बुधवार दोपहर करीब 12 बजे लखनऊ जाने के लिए बाराबंकी डिपो की बस देवा रोड स्थित स्टेशन पर पहुंची। बस का बाहरी ढांचा दूर से देखने में ठीक था। नजदीक जाने पर बस का अगला हिस्सा काफी जर्जर मिला। बस के भीतर की दशा भी ठीक नहीं थी। कई सीटों से कवर गायब थे।
पीछे की कुछ सीटें हिल रही थीं। शाम करीब नौ बजे इसी स्टेशन पर बस यूपी 41 एटी 8712 में बाईं ओर बैक मिरर था, लेकिन दाईं ओर का मिरर नहीं था। स्टेशन पर ही खड़ी बस की खिड़की पर लगा शीशा टूटा हुआ था। एक सीट के बगल तो शीशा ही गायब था। शीशे ढीले होने के कारण यात्रा के दौरान खड़खड़ाते रहते हैं।
नहीं है वर्कशॉप
125 बसों का संचालन करने वाले बाराबंकी डिपो के पास आज तक अपनी वर्कशॉप नहीं है। हालत यह है कि बसें सड़क पर दौड़ने से पहले नहीं, बल्कि टूटने के बाद ही जुगाड़ से सुधारी जा रही हैं। शहर से बाहर करोड़ों की लागत से बना अंतरजनपदीय बस स्टेशन भी फिलहाल बिना वर्कशॉप के ही है। बसों की सेहत सुधारने का इंतजाम अब भी अधूरा है।
27 को भेजा नोटिस
डिपो की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल अप्रैल महीने में ही 27 बस स्वामियों को उनकी बसों के खटारा होने की नोटिस जारी करनी पड़ी। इन नोटिसों में स्पष्ट कहा गया है कि एक माह के भीतर बसों को दुरुस्त किया जाए, वरना संचालन पर रोक लग सकती है।
मुख्यालय पर दो बस स्टेशन
जिला मुख्यालय पर दो बस स्टेशन संचालित हैं। देवा रोड स्थित बस स्टेशन से अनुबंधित बसों का संचालन होता है। इन बसों में परिचालक परिवहन निगम का होता है जबकि चालक और बस की पूरी जिम्मेदारी निजी बस स्वामी की होती है। यहीं से असली गड़बड़ी शुरू होती है। टूटी खिड़कियां, गायब मिरर और जर्जर बॉडी सामान्य बात है।
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केंद्र प्रभारी ने निर्देश दिए हैं...
केंद्र प्रभारी एके अवस्थी ने बताया कि बसों का रखरखाव सुनिश्चित कराया जा रहा है। सीट कवर, एंट्री गेट, शीशे दुरुस्त कराने की निर्देश दिए गए हैं। जिन बस की सीट हिल रही हैं, उनको भी ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्पीड गर्वनर चेक किए जा रहे हैं। मई में फिर समीक्षा होगी।