अस्तपाल की स्थिति देख राज्यमंत्री दंग रह गए। दोनों अस्पतालों का भ्रमण करने और मरीजों से बातचीत करने के बाद कहा कि जिला अस्पताल दलाल चला रहे हैं। सरकार ने सब कुछ फ्री कर रखा है।
इसके बावजूद बाहर से जांचें कराई जा रही हैं। दवाएं भी बाहर से लिखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार न हुआ और दलालों पर रोक नहीं लगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान चार डॉक्टर और चार कर्मचारी गायब पाए गए। स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. शिवप्रताप सोमवार दोपहर बाद करीब डेढ़ बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले चिकित्सकों की उपस्थित देखी।
इस दौरान कई चिकित्सक और कर्मचारी बिना सूचना के गायब मिले। चिकित्सक कक्षों के निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री को नहामऊ के रामजियावन ने बताया कि उसे एक्स-रे बाहर से लिखा गया है। बाहर से एक्स-रे कराने पर 350 रुपये खर्च हुए।
इसके बाद वह इमरजेंसी वार्ड पहुंचे जहां भर्ती राजेश के साथ मौजूद हैदरगढ़ की संगीता ने बताया कि कुछ इंजेक्शन बाहर से मंगाए गए हैं। अल्पना सैनी के तीमारदारों ने भी बाहर से दवाएं मंगाए जाने की बात राज्यमंत्री को बताई।
सफाई कर्मी मुन्नी ने बताया कि तीनों वार्डों की सफाई अकेले उसी को करनी पड़ रही है। इस पर सीएमएस से राज्यमंत्री ने जवाब मांगा। हृदयरोग चिकित्सक के कक्ष में पहुंचे राज्यमंत्री ने डॉ. संजीव वर्मा से पूछा कि कितने मरीज देखे। उन्होंने 71 मरीज देखने की जानकारी दी।
जनरल वार्ड पहुंचे राज्यमंत्री को मऊजानीपुर के अनिल और संदूपुर के शेषपाल ने बताया कि उसे भी बाहर से दवाएं लिखी गई हैं। वार्ड की खिड़की टूटी देख उनकी भौहें तनी और सीएमएस से पूछा इसे सही क्यों नहीं कराया, पैसा नहीं है क्या?
राज्यमंत्री का काफिला महिला अस्पताल पहुंचा जहां उन्होंने उपस्थित रजिस्टर देखा तो डॉ. भावना एक नवंबर से अनुपस्थित पाई गई। बताया गया कि वह बीमारी के कारण अवकाश पर हैं।
वार्ड का निरीक्षण किया तो पता चला कि 22 बेड के वार्ड में महज आठ प्रसव पीड़िताएं भर्ती हैं। इस पर राज्यमंत्री भड़क गए। कहा कि सब पता है दलालों का बोलबाला है। नर्सिंग होम में जगह नहीं है और सरकारी अस्पताल खाली पड़ा है। अब समझ में आया कि मरीजों को क्यों रेफर कर दिया जाता है।
सीएमएस को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि दलाल अस्पताल परिसर में नजर आए तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा। सीएमओ से कहा कि इस पर नजर रखी जाए। पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाए।
राज्यमंत्री ने कहा कि जैसी शिकायत मिली थी वह सही पाई गई। दवाएं और जांचें बाहर से कराई जा रही हैं जबकि सरकार ने सब फ्री कर रखा है। अस्पतालों की साफ सफाई संतोषजनक नहीं है।
टायलेट मरीजों को और बीमार कर देने लायक है। उन्होंने कहा कि हमारे पास पर्याप्त संसाधन हैं। मरीज को बेहतर इलाज दे भी सकते हैं लेकिन सरकारी अस्पतालों में ऐसा नहीं हो रहा है।
गैरजिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने बताया ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हो गया है और प्रयास है कि इसे जनवरी माह से शुरू कर दिया जाए।