बाराबंकी। जमुरिया नाले की सफाई के दौरान आवास विकास परिषद की तोड़ी गई बाउंड्रीवाॅल के प्रकरण पर कमिश्नर आवास के पत्र के बाद प्रशासन ने रिटर्निंग वाॅल न तोड़ने का फैसला लिया है। साथ ही आवास विकास परिषद के इंजीनियर और एडीएम ने मौके का निरीक्षण कर निर्णय लिया कि यहां पर लोगों को प्लाॅट देने के बजाय हरित पट्टी और रास्ता बनाया जाए।
बता दें कि जमुरिया नाला सफाई के दौरान कुछ कर्मचारियों की मनमानी प्रशासन पर भारी पड़ी है। बिना तह में गए आवास विकास की बाउंड्री तोड़ने का काम जिस तरह शुरू कर दिया गया, उस पर प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। आवास विकास की आपत्ति के बाद बाउंड्री का ध्वस्तीकरण रोक दिया गया है। परिषद के एक्सईएन अमन त्यागी व एई अजीत मौर्या बताते हैं कि बाउंड्री तोड़े जाने के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई है। मामले में कमिश्नर डॉ. बलकार सिंह ने डीएम को पत्र लिखकर जांच समिति गठित करने और नए सिरे से पैमाईश करने के निर्देश दिए। जिस पर आवास विभाग के अभियंता व एडीएम अरुण कुमार सिंह ने मौके पर जाकर जांच की तो पाया कि आवास विकास की जमीन 1980 में खरीदी गई थी। तब विनियमित क्षेत्र घोषित नहीं हुआ था और पूरा प्रोजेक्ट रेरा से अप्रूव्ड पाया गया। इस कारण रिटर्निंग वाल तोड़ना गलत था और आगे उसे तोड़ने पर रोक लगा दी गई है।
जमुरिया की सफाई में दोनों तरफ 12.50 मीटर लेकर सफाई की जा रही थी। उसी की जद में आने से आवास विकास की रिटर्निंग वाॅल इसलिए हटाई गई कि कोई सरकारी होने पर पक्षपात पूर्ण का आरोप न लगा पाए। जांच में पाया गया कि विनियमित क्षेत्र घोषित होने से पहले पूरा प्रोजेक्ट स्वीकृत हो गया था। सुरक्षा की दृष्टि से तय किया गया है कि जमुरिया किनारे प्लाटों की जगह हरित पट्टी और रास्ता बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी का नुकसान न हो। - सत्येंद्र कुमार, डीएम