बाराबंकी। वन डिस्ट्रिक वन वेटलैंड के तहत चयनित की गई भगहर झील के विकास व सौंदर्यीकरण को लेकर कई प्रस्ताव व प्रोजेक्ट तैयार किए गए। कुछ काम हुआ भी है लेकिन उसकी देखरेख नहीं हुई। नतीजा व्यवस्था बदहाल हो गई। ऐसी हालत में अब यह झील सौंदर्यीकरण के साथ देखरेख का इंतजार कर रही है।
राममनगर से सूरतगंज जाने वाले मार्ग पर स्थित भगहर झील करीब 75 हेक्टेयर में फैली है। इसकी लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर व चौड़ाई 250 मीटर है। आठ लाख पांच हजार वर्गमीटर में फैली इस झील में 24 लाख 15 हजार क्यूबिक मीटर पानी की क्षमता है। जबकि सिल्ट जमा होने पर यह क्षमता 12 लाख हजार क्यूबिक मीटर के आसपास रह जाती है। वर्ष 2022 में वन डिस्ट्रिक वन वेटलैंड में भगहर झील का चयन हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार भगहर झील की देखरेख के लिए कर्मचारियों की तैनाती 24 घंटे होने चाहिए। इस झील में बोट चलाने की योजना भी अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। 2022 से अब तक देखरेख के अभाव में यहां बनाए गए रैनबसेरा, बैठक, खेल मैदान वीरान पड़ा है।
बस कार्यक्रमों में ही जुटती है भीड़
ग्रामीणों की माने तो भगहर को वन डिस्ट्रिक वन वेटलैंड में चयनित करने के बाद जब कोई कार्यक्रम होता है तो तभी अधिकारी न जनप्रतिनिधि यहां पहुंचते हैं। बाकी दिनों में यहां कोई पूछने नहीं आता है। हालांकि गत दिनों में जिले के डीएफओ आकाश बाधवान ने झील का कायाकल्प करने के प्रयास प्रारंभ किए है। जिससे ग्रामीणोें की उम्मीदें जगी हैं।
भगहर झील एक बड़े पर्यटन स्थल के रुप में सामने आ सकती है। इसकी जलकुंभी से साड़ी बनाने व आसपास का माहौल पर्यटन के दृष्टि से बेहतर बनाने का प्रयास हो रहा है। हम भगहर को मिसाल के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं।
- आकाश बाधवान, डीएफओ