बाराबंकी। बाराबंकी के एक छोटे से गांव से वर्ष 2012 से शुरू हुआ मधुमक्खी पालन का अभियान डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन तक पहुंंच गया। जिले में शहद उत्पादन से गांव व अपनी तस्वीर बदलने वाल निमित सिंह ने उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के साथ सम्मेलन में मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इस वैश्विक आयोजन में 120 देशों से आए विशेषज्ञों, उद्यमियों और किसानों के बीच भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने काफी सशक्त भूमिका निभाई।
प्रतिनिधिमंडल में जिले के निमित सिंह और बागपत के जयदेव सिंह भी शामिल रहे। निमित सिंह ने बताया कि सम्मेलन में प्रदर्शित विभिन्न देशों के शहद और उससे जुड़े उत्पादों को देखा। यहां शहद के अलग-अलग स्वाद, पोलन, प्रोपोलिस, वैक्स और हनी वाइन जैसे उत्पाद देखने को मिले और एक दूसरे से अनुभव साझा किए। सम्मेलन के दौरान आधुनिक उपकरणों और नवीनतम तकनीकों से परिचय ने मधुमक्खी पालन को नई दिशा देने की राह खोली। इससे निश्चित ही उत्तर प्रदेश और भारत के मधुमक्खी पालकों को लाभ मिलेगा और देश वैश्विक मंच पर और सशक्त बनेगा।
इस आयोजन में पंजाब, राजस्थान और हरियाणा से आए मधुमक्खी पालक किसान दिलीप, प्रेमपाल व गगन से भी बातचीत हुई। अनुभव साझा करने और आपसी सहयोग की यह प्रक्रिया भविष्य में मधुमक्खी पालन के क्षेत्र को विस्तार देने में काफी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मजबूत भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत जल्द ही शहद उत्पादन और मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र बनेगा।