बाराबंकी। छह जिलों को मिलाकर बनाए जा रहे राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के बाद आने वाले सालों में जिले की तस्वीर बदलेगी। सबसे अधिक लाभ उन युवाओं को होगा जो नौकरी व काम की तलाश में दिल्ली, नोयडा, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई व पुणे जैसे शहरों को जाते हैं क्योंकि एससीआर में प्रदेश का दूसरा औद्योगिक शहर बसाने की तैयारी है। ऐसे में हजारों युवाओं को एससीआर में ही रोजगार मिलेगा।
एससीआर के गठन में बाराबंकी की नगर पालिका नवाबगंज, देवा, सतरिख व बंकी नगर पंचायतों के साथ 234 गांव शामिल करने का प्रस्ताव है। जिले का युवा खासकर गांवों में रहले वाले लोग छोटी-मोटी नाैकरी की तलाश में अन्य प्रांतों व महानगरों को जाते हैं।
हालात ये हैं कि हर गांव में दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, पुणे, पंजाब व हरियाणा में काम करने वाले लोग मिल जाएंगे। जिले के 1800 से अधिक गांवों के करीब 20 हजार लोग बाहर फैक्टरियों व कारखानों में काम करते हैं। एससीआर के गठन के बाद नॉलेज पार्क, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्थापित होंगे। नामीगिरामी कंपनियां भी आएंगी।
अधिकारियों के अनुसार बाराबंकी में कच्चे माल व मैनपाॅवर की कमी नहीं है। एससीआर में बाराबंकी जिला ही ऐसा है जो लखनऊ के सबसे नजदीक या यूं कहें सटा है। पूर्वांचल का द्वार होने के साथ अयोध्या के नजदीक होने से आने वाले दिनों में बाराबंकी उद्योगों का गढ़ बन सकता है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा तो पलायन थमेगा।
तेजी से होगा जिले का विकास
एससीआर के गठन से संबंधित पत्र मिलने के बाद इस पर काम शुरू होगा। इससे जिले का विकास तेजी से होगा। रोजगार के साथ स्तरीय सुविधाएं भी मिलेंगी।
- सत्येंद्र कुमार, डीएम