सीतापुर निवासी पूजा वर्मा ने कहा, “सुबह से बस का इंतजार कर रहे हैं। दो बसें भरकर निकल गईं, लेकिन जगह नहीं मिली। भाई को राखी बांधने घर जाना है, इसलिए इंतजार कर रहे हैं।”
फतेहपुर निवासी रामकुमार ने बताया, “करीब तीन घंटे से यहां बैठे हैं। बस आते ही इतनी भीड़ टूट पड़ती है कि बच्चों और बुजुर्गों के साथ चढ़ना मुश्किल हो जाता है।”
लखनऊ जाने वाली यात्री शबनम ने कहा, “महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा अच्छी सुविधा है, लेकिन बसें कम पड़ रही हैं। धूप में बच्चों के साथ इंतजार करना बहुत परेशानी भरा है।” एक बुजुर्ग यात्री शिवकुमार बोले, “रक्षाबंधन पर हर कोई घर पहुंचना चाहता है। बसों की संख्या बढ़ा दी जाती तो यात्रियों को घंटों परेशान नहीं होना पड़ता।”