बाराबंकी। प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी रविवार को अपनी पत्नी के साथ पद्मश्री रामसरन वर्मा के दौलतपुर स्थित कृषि फार्म पर पहुंचे। पद्मश्री की खेती देखने के बाद उन्होंने कहा कि जो सुना था, उससे बेहतर देखने को मिला।
केले के टिश्यू कल्चर के बारे में बात की तो पद्मश्री रामसरन वर्मा ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट व पुणे से टिश्यू कल्चर के पौधे मंगाए जाते हैं। अच्छे पौधों का प्रयोग वे स्वयं कर लेते हैं और बचे हुए हम लोगों को देते हैं। अगर, अपने यहां सुविधाएं मिलें तो किसान और बेहतर कर सकते हैं। ऐसे में प्रमुख सचिव ने कहा कि किसानों का केले की खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। ऐसे में केले के टिश्यू कल्चर की लैब प्रदेश में बनेगी। इसके लिए आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को चुना जाएगा।
अपर मुख्य सचिव ने पद्मश्री की बेड विधि से बोई गई आलू की फसल देखकर उसकी सराहना की। पद्मश्री ने बताया कि इस विधि से तीन सौ क्विंटल प्रति एकड़ आलू का उत्पादन होता है। जिले में कांट्रैक्ट खेती कर किसान मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं खेत में ही टमाटर, तरबूज व खरबूजे का बाजार मिलता है।
ऐसे में मंडी से अच्छी कीमत किसानों को खेत में ही मिल जाती है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि किसान बिल में सरकार की यही मंशा तो है। इस मौके पर उपकृषि निदेशक अनिल कुमार सागर व जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार भी मौजूद रहे।