बाराबंकी। कोरोना जैसी महामारी से लोग जूझ रहे हैं फिलहाल इससे जल्द राहत मिलने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। वहीं एक अन्य जानलेवा बीमारी ब्लैक फंगस ने तेजी से अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। इस बीमारी का भी एक मरीज जिले में मिल चुका है, इसके बाद भी विभाग के पास इस बीमारी से निपटने के कोई इंतजाम नहीं है।
कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस जैसी बीमारी की चपेट में आकर लोग जान गंवा रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग के पास इस बीमारी से निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि लोगों में यह रोग बहुत तेजी से फैल रहा है और इसकी चपेट में आकर लोग असमय ही काल के गाल में समाते जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में राजधानी लखनऊ में इसके कई केस सामने आए हैं। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
जबकि इस ब्लैक फंगस का एक मरीज जिले में भी मिल चुका है। जिसका उपचार लखनऊ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद भी विभाग के पास इस रोग से निपटने के लिए जांच तो दूर दवाएं तक नहीं है। ऐसे में इस रोग से पीड़ित मरीजों को तत्काल लखनऊ के मेडिकल कॉलेज रेफर करने के अलावा विभाग के पास कोई रास्ता नहीं है। यहीं नहीं विभाग के पास इस बात का भी कोई डाटा उपलब्ध नहीं है कि जिले में कितने लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं।
पहले दिखाई होती सक्रियता तो बेकाबू न होते हालात
सूत्रों का कहना है कि कोरोना जैसी महामारी पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जितनी सक्रियता अब दिखा रहे हैं अगर इतनी पहले दिखाते तो शायद हालत इतना बेकाबू न होते। हालांकि तब विभागीय अधिकारियों ने इसके बहुत हल्के में लिया और पानी जब सिर से ऊपर निकलने लगा तब रोग पर काबू पाने के लिए टीमें सक्रिय की गई। यहीं हाल ब्लैक फंगस को लेकर होने वाला है। विभाग अभी इस रोग को काफी हल्के में ले रहा है। लेकिन यदि समय रहते नहीं चेते तो ये लापरवाही भारी पड़ सकती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।
बायोप्सी से होगी रोग की पुष्टि
ब्लैक फंगस की पुष्टि सिर्फ और सिर्फ बायोप्सी जांच से ही संभव हैं जोकि सीएचसी-पीएचसी और जिला अस्पताल में संभव नहीं है। इसके अलावा इस रोग से निपटने के लिए जो इंजेक्शन और दवाएं चाहिए वह भी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है। ऐसे हालात में इस रोग से निपटना विभाग के लिए आसान नहीं है।
जिले में ब्लैक फंगस का एक केस प्रकाश में आया है जिसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। वहीं इस संबंध में सभी सीएचसी अधीक्षकों को भी आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए और जैसे ही सूचना मिल तत्काल जानकारी दी जाए।
-डॉ. बीकेएस चौहान, सीएमओ