बाराबंकी। प्रदेश के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से जुड़े एंबुलेंस प्रकरण में आरोपी डॉ. अल्का राय व डॉ. शेषनाथ राय की जमानत याचिका सुनवाई के बाद प्रभारी सेशन जज ने खारिज कर दी।
पंजाब की रोपड़ जेल में लम्बे समय तक बंदी रहे मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी ने कोर्ट में पेशी पर जाते समय बाराबंकी में पंजीकृत एंबुलेंस का प्रयोग किया था। तभी से यह प्रकरण हाई प्रोफाइल होकर सुर्खियों में आया। प्रशासन की छानबीन पाया गया कि फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन एआरटीओ कार्यालय बाराबंकी में कराया गया। इसके बाद एआरटीओ प्रशासन बाराबंकी पंकज सिंह ने मामले की एफआईआर कोतवाली नगर में दर्ज कराई थी।
विवेचना के दौरान करीब आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। डॉ. अल्का राय व शेषनाथ निवासी मऊ को अप्रैल के अंतिम सप्ताह में गिरफ्तार कर विवेचक ने कोर्ट से रिमांड लेकर जेल भेजा था। जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिए गये कि कोविड नियंत्रण में दोनों डॉक्टर आरोपियों ने जनहित में कार्य किये हैं, उनके पलायन करने की संभावना नहीं है। जेल में बंद होने की वजह से वे मरीजों की सेवा नहीं कर पा रहे हैं।
वह विवेचना में भी सहयोग को तैयार हैं। यह भी तर्क दिया गया कि डॉ. अल्का राय 57 साल की हैं और राजनीतिक दबाव डालकर गलत तरीके से एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार पांडेय ने बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत दलीलों का कड़ाई से विरोध किया। कहा कि यह प्रकरण अपराधी मुख्तार अंसारी से जुड़ा अति गंभीर मामला है और बड़ी जालसाजी कर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एंबुलेंस का पंजीकरण कराकर अपराधी मुख्तार अंसारी के उपयोग में दिया गया जो अति गंभीर प्रकृति का अपराध है। इसलिए जमानत प्रदान किया जाना उचित नहीं है।