सूरतगंज/कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद तेजी से कटान हो रही है। नदी की धारा कई नए गांवों में कटान करने लगी है। करीब 800 हेक्टेयर लहलहाती फसल बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी है। तटबंध पर बसे परिवारों को सरकारी मदद का सहारा है। कई गांवों में नदी का पानी घरों के पास पहुंंच गया है। लोग अपने घरों को तोड़कर सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं।
रामनगर तहसील क्षेत्र में चार-पांच दिनों से नदी की तेज कटान से बबुरी गांव के लोग सहमे हुए हैं। कटान की रफ्तार यही रही तो जल्द गांव नदी में समाहित हो जाएगा। यहां के निवासी सुभाष उर्फ अंबर प्रसाद ने बताया कि गांव व नदी के बीच की दूरी बहुत कम हो गई है। सरसंडा गांव का पंचायत भवन भी निशाने पर है। बबुरी के अलावा नदी के उस पार बसे जमका व खुज्जी के कई घर नदी के मुहाने पर हैं। कटान रोकने के कोई इंतजाम नहीं हैं। वहीं, सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में नदी की धारा भैरवकोल गांव से तेलवारी गांव की ओर मुड़ गई थी। अब नदी की धारा फिर कहारनपुरवा गांव के पास से सीधी हो गई है और सनावा गांव में तेजी से कटान कर रही है। धान व गन्ने की फसल नदी में समा रही है।
बाढ़ से बचाव में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : डीएम
डीएम अविनाश कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए लगातार बचाव एवं राहत कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, रविवार को रामनगर के प्रभावित गांवों में भोजन के 2100 पैकेट बांटे गए। नौ नाव लगी रहीं। 79 लोगों का मेडिकल टीम ने उपचार किया।