बाजार शुकुल। पूरे शुकलन गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन रविवार को प्रवाचक निर्मेष महाराज ने कहा कि रामकथा सुनने से मनुष्य को मुक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। अहंकार और क्रोध आने पर मनुष्य का विवेक और बल दोनों क्षीण हो जाते हैं। प्रवाचक ने कहा कि भाव बिना भक्ति संभव नहीं है। कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। श्रीराम ने अपने जीवन में माता-पिता की आज्ञा, भाईचारे, त्याग, मर्यादा और धर्म का पालन कर आदर्श स्थापित कर अपनाने का संदेश दिया।