बाराबंकी। दोपहर बाद शुक्रवार को तेज हवाओं के साथ हुई झमाझम ने किसानों के मुरझाए चेहरों पर चमक लौटा दी। किसानों का कहना है कि यह बारिश खेतों में सूख रही धान की फसल के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। यह पानी नहीं बल्कि आसमान से अमृता बरसा है। तीन घंटे के दौरान जिले में 232 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड हुई।
तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के दौरान कई जगह पेड़ व सूचना बोर्ड उखड़कर सड़क व हाईटेंशन लाइन पर गिर पड़े। इससे कई जगह यातायात जाम होने के साथ ही लोगों को बिजली संकट की परेशानी से भी घंटों जूझना पड़ा। इस दौरान सबसे ज्यादा बारिश हैदरगढ़ में तो सबसे कम बारिश रामसनेहीघाट और सिरौलीगौसपुर में हुई है। इससे बीते एक पखवारे से उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को भी राहत मिली है।
जिले में एक लाख 92 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई हुई है। 18 जुलाई को हुई 105 मिमी बारिश के बाद से जिले में सूखे जैसे हालात हो गए थे। बारिश न होने से खेतों में लगी धान की फसल भी सूखने लगी थी। फसल चौपट हो जाने की आशंका ने किसानाें की नींद उड़ा दी थी। जिला कृषि अधिकारी राजितराम का कहना है कि यह बारिश धान की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।