कोर्ट ने सात वर्ष पहले पंचायत चुनाव के दौरान दोहरे हत्याकांड के मामले में सभी नौ आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने लचर विवेचना के लिए विवेचक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है। इस मामले में तीन आरोपी अभी तक जेल में है।
कोतवाली नगर के ग्राम पंचायत बड़ेल में पंचायत चुनाव के दौरान ग्राम प्रधान व बीडीसी प्रत्याशियों के बीच चुनाव मैदान से हटने को लेकर बुलाई गई बैठक में बात नहीं बनी तो एक पक्ष ने दूसरे पर असलहों से लैस होकर हमला बोल दिया, जिसमें दो प्रत्याशियों की मौत हो गई थी।
मृतक जीतू के पिता राजेंद्र नाथ मिश्रा ने कोतवाली नगर में 26 सितंबर 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि पुत्र जीतू मिश्रा प्रधान पद व सुभाष नगर निवासी जयवीर सिंह बीडीसी सदस्य के प्रत्याशी थे। दोनों, प्रधान पद के प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह उर्फ राजू व बीडीसी सदस्य के प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे।
25 सितंबर 2010 की रात 10 बजे पुष्पेंद्र ने जीतू व जयवीर को बातचीत के लिए घर बुलाया। तभी वहां लोग जीतू व जयवीर पर पर्चा वापसी का दबाव बनाने लगे। पर्चा वापसी से मना कर जीतू व जयवीर उठकर बाहर आ गए। तभी पुष्पेन्द्र उर्फ सरोज, बलराम सिंह, राजू प्रधान, तरुण सिंह, मनोज बुन्देला व अन्य दो लोगों ने असलहों से ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे।
गोलियां लगने से जीतू व जयवीर की मौके पर ही मौत हो गई। इसका केस दर्ज कर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जितेन्द्र गिरी द्वारा विवेचना के दौरान आरोपियों के घर में लाइसेंसी असलहे, रिवॉल्वर , बंदूूकें, व राइफलें भी बरामद की। विवेचना के दौरान ज्ञानेश सिंह, राघवेन्द्र सिंह, चन्द्रशेखर वर्मा, मोहनसिंह, व कमलेश कुमार के नाम भी प्रकाश में आए।
मामले में ज्ञानेश सिंह, चन्द्रशेखर वर्मा, व बलराम सिंह की जमानत नहीं मिली थी। करीब सात साल के दौरान मुकदमे की विभिन्न अदालतों में सुनवाई के दौरान वादी मुकदमा समेत दस गवाह पेश किए गए। इस दौरान मृतक के पिता द्वारा अन्य गवाहों पर आरोपियों से मिल जाने के प्रार्थना पत्र पर गवाही नहीं कराई गई।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमए खान ने दोनों पक्षों दलीलें सुनने के बाद साक्ष्य के अभाव में मुकदमे के सभी नौ आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता राजकुमार वर्मा ने बताया कि वह न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय खंड पीठ लखनऊ में अपील करेंगे।
दोहरे हत्याकांड में पांच लोगों को नामजद किया गया था। पांच लोग विवेचना में आरोपी बनाए गए थे। इसमें से छह आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। तीन आरोपी जेल में बंद हैं। एक आरोपी कमलेश को पुलिस सात साल में तलाश नहीं पाई, न ही वह अदालत में पेश हुआ।