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108 घड़ियालों को मिला प्राकृतिक वास, टीम ने सरयू में छोड़ा

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बाराबंकी में रामनगर क्षेत्र के सरयू नदी तट पर घड़ियाल। संवाद - फोटो : BARABANKI
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बाराबंकी। लखनऊ के घड़ियाल पुनर्वास केंद्र, कुकरैल में 2019 में पैदा हुए 108 घड़ियालों को बृहस्पतिवार को प्राकृतिक वास मिला। लखनऊ से लाए गए इन घड़ियालों को एक के बाद एक जिले की सरयू नदी में छोड़ दिया गया। सभी घड़ियाल सरयू की जलधारा में गुम हो गए। घड़ियालों की लंबाई चार से छह फीट की है। इस ऑपरेशन की सफलता के बाद टीम के सदस्यों ने एक दूसरे को बधाई दी।
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लखनऊ के कुकरैल स्थित घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में विभाग की लुप्तप्राय परियोजना के तहत घड़ियालों को संरक्षित किया गया था। वर्ष 2019 में पैदा हुए इन घड़ियालों को सरयू में छोड़ने का फैसला कुछ दिन पहले लिया गया था। बृहस्पतिवार को घड़ियाल पुनर्वास केंद्र के क्षेत्रीय वन अधिकारी सीएल गुप्ता की अगुवाई में विभाग की एक टीम घड़ियालों को सुरक्षित तरीके से पैक करने के बाद मालवाहन से लादकर जिले के रामनगर रेंज पहुंची।
यहां पर स्थानीय वन अधिकारियों को भी इस काम में शामिल किया गया। सरयू के किनारे घड़ियालों को ले जाया गया। जहां बहुत सुरक्षात्मक तरीके से एक के बाद एक घड़ियाल को नदी में छोड़ दिया गया। इस काम में करीब तीन घंटे लगे। डीएफओ रुस्तम परवेज ने बताया कि घड़ियालों को अब प्राकृतिक वास मिल गया है। अभी तक पुनर्वास केंद्र में इनके लिए भोजन की व्यवस्था की जाती थी मगर सरयू में ये स्वयं स्वछंद तरीके से रह सकेंगे।
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