बाराबंकी। शहर में आठवीं मोहर्रम पर सोमवार को अलम का जुलूस बेगमगंज शाही मस्जिद से निकाला गया। अंजुमनों की टोलियां देर रात तक नौहाख्वानी व सीनाज़नी करती रही। जगह-जगह पर कमा जंजीरों का मातम हुआ। निर्धारित रास्तों से होता हुआ जुलूस देर रात कटरा इमाम बाड़ा मीर मासूम अली पहुंचा। जुलूस के दौरान सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम रहे।
रास्ते में स्टॉल लगाकर लोगों ने सबील का इंतजाम कर शर्बत बांटकर जुलूस का स्वागत किया। वहीं नवाब अमजद अली खां बेगमगंज के अज़ाखाने में अशरे की आठवीं मजलिस को खिताब किया। मजलिस से पहले हाजी सरवर अली करबलाई ने अपना कलाम पेश किया। करबला सिविल लाइन और रिफाकत रिजवी के अजाखाने की आठवीं वीं मजलिस को मौलाना मुजतबा मीसम ने खिताब किया। इमाम बाड़ा मीर मासूम अली कटरा मे मौलाना ने मसायब पेश की, जिसे सुनकर मोमनीन रो पड़े। मजलिसों का यह सिलसिला हैदर हाउस होता हुआ कम्पनी बाग, लाइन पुरवा रफी नगर, अस्करी नगर,बेलहरा हाउस तकिया व पीर बटावन मे देर रात तक चलता रहा।
जैदपुर कस्बे के मोहल्ला मुक्खिन से असलम की अगवाई में सात मुहर्रम की रात में मेहंदी व अलम का जुलूस रविवार की रात आठ बजे बड़ी अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। मेहंदी में ऊंट व घोड़ों के साथ नगाड़ा, बैंडबाजे के साथ शहनाई की धुन भी बजाई जा रही थी। मेहंदी के जुलूस में अंजुमन द्वारा नोहख्वानी पेश कर कर्बला में शहीद हुए शहीदों को याद किया जा रहा था।जुलूस मोहल्ला छेदा कटरा में नौहाख्वानी पेश की गई।