रामनगर (बाराबंकी)। तराई की धरती पानी के बिना दरक रही है। खेतों में लगी फसलों को पानी न मिल पाने से फसलें सूख रही हैं। रामनगर तहसील प्रशासन ने राजस्व टीम भेजकर सूख रही फसलों का सर्वे शुरू कराया गया है। बारिश कम होने से किसानों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही है।
रामनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम कुतलुपुर, हरक्का, बतनेरा, डिहुवा, अटाहरी सहित कई ऐसे गांव हैं, जहां पर सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने के चलते किसानों को पूरी तरह से मौसम पर ही निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन मानक के हिसाब से बरसात न होने से किसानों की कमर टूट चुकी है। खेती के सहारे ही बहुत से किसानों को दो जून की रोटी नसीब होती है।
इससे इन किसानों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। बारिश से ही खेतों के साथ-साथ प्यास बुझाने वाले पानी का जलस्तर भी ऊपर बढ़ता है। मौसम की बेरुखी से इस बार आषाढ़ के बाद सावन में भी पानी बरसाने वाले बदरा रूठे रहे। इस कारण जून से लेकर अगस्त तक के मध्य निर्धारित औसत के अनुसार बरसात नहीं हो पायी। ऐसे में प्रशासन द्वारा रामनगर तहसील में फसलों के सर्वे के साथ ही गांवों की जमीनी हकीकत जानने के लिए राजस्व टीमें लगाकर क्षेत्र में फसलों का सर्वे कराने का कार्य शुरू करा दिया है। संवाद