बाराबंकी। लोनीकटरा थाना क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव में गहरी दोस्ती का दर्दनाक अंत देख कर पूरा गांव स्तब्ध है। युवक शशांक दीक्षित द्वारा फांसी लगाने के महज 48 घंटे बाद ही उसके जिगरी दोस्त आशुतोष दीक्षित (31) ने भी फंदा से लटक कर जान दे दी। दोनों की गहरी दोस्ती को जानने वालों का कहना है कि शशांक की मौत ने आशुतोष को भीतर तक तोड़ दिया था।
गांव में लगातार हुई दो युवाओं की मौत से शोक व्याप्त है। इससे पहले शशांक की मौत की खबर सुनने के बाद उसकी मां को हार्ट अटैक आ गया था। उनका इलाज गंभीर हालत में लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चल रहा है। लक्ष्मणपुर निवासी शशांक का शव बुधवार सुबह घर के भीतर फंदे से लटका मिला था।
अविवाहित शशांक की मौत की खबर से परिवार ही नहीं, गांव के लोग भी सदमे में थे। पोस्टमार्टम के बाद बृहस्पतिवार को शशांक का अंतिम संस्कार गांव में गमगीन माहौल में हुआ था। इसके बाद से शशांक का दोस्त आशुतोष काफी अवसाद में आ गया था। अंतिम संस्कार के बाद वह अपनी साली को छोड़कर घर लौटा था।
आशुतोष की पत्नी दीपा अपने दो वर्षीय पुत्र के साथ मायके में थी।शुक्रवार सुबह पिता ने देखा कि आशुतोष का शव छत पर बने हुक में पत्नी की साड़ी से बने फंदे से लटका है। घटना के समय घर पर उसके वृद्ध पिता ही मौजूद थे। मां का निधन काफी पहले हो चुका है।
मिसाल थी शशांक व आशुतोष की दोस्ती
गांव के नितिन तिवारी और दीपू दीक्षित बताते हैं कि शशांक और आशुतोष की दोस्ती सबके बीच मिसाल थी। दोनों हर सुख-दुख में साथ रहते थे। शशांक की मौत के गहरे सदमे से उबर न पाने के कारण आशुतोष ने भी अपनी जान दे दी। थानाध्यक्ष अभय कुमार मौर्य ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल परिजनों की ओर से किसी प्रकार की तहरीर नहीं दी गई है।