बाराबंकी। इस वर्ष आयोजित यूपी बोर्ड की परीक्षा में जिले के 28,682 छात्र-छात्राओं ने इंटर की परीक्षा पास की है। मगर जिले में संचालित 70 डिग्री कॉलेजों में से कुछ एक को छोड़कर बाकी कॉलेज प्रवेश के लिए उनकी उम्मीदों पर खरे साबित नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते ही नई शिक्षा नीति और आधुनिक रोजगारपरक कोर्सों के अभाव में यहां के विद्यार्थियों को स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए महानगरों की राह पकड़ने को विवश होना पड़ रहा है।
प्रवेश लेने वाले छात्रों और अभिभावकों की पहली मांग है कि पढ़ाई ऐसी हो, जो उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ सके। इसके लिए बीबीए, बीसीए, फार्मेसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्सों की मांग बढ़ी है। इसके बावजूद जिले के अधिकतर कॉलेज अब भी पारंपरिक तौर पर बीए, बीएससी और बीकॉम व कुछ नए कोर्स तक ही सीमित हैं। छात्र रामेंद्र, कौशिक, जितेंद्र, संजय पांडेय, मनीराम और विशंभर कहते हैं कि बीएससी के कॉलेजों में भी गणित और जीवविज्ञान विषयों में असंतुलन है। गणित विषय में रुचि कम होने से हर साल सीटें खाली रह जाती हैं।
अवध विश्व विद्यालय से जुड़े बाराबंकी के 70 डिग्री कॉलेजों में से अधिकांश में न तो रोजगारोन्मुखी कोर्स संचालित हो रहे हैं और न ही छात्र संख्या के अनुरूप सीटें भरी जा रही हैं। डीएम शशांक त्रिपाठी ने बताया कि जल्दी जिले में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को शुरू कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजा जाएगा।
पिछले सत्र की खाली सीटें बताती है हकीकत
-जनेस्मा कॉलेज: बीएससी में 300 में से 113 सीटें व एमएससी (रसायन) में 54 में से 48 सीटें रिक्त।
- रामखेलावन डिग्री कॉलेज असंद्रा: ग्रामीण इलाके के इस कॉलेज में 300 में से 190 सीटें खाली रहीं।
- मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला महाविद्यालय: यहां बीएसी की 480 में से 200 सीटें खाली।
नए कोर्स के साथ हो करिअर काउंसलिंग जरूरी
छात्रों की मांग है कि कॉलेजों में आधुनिक लैब और इंटर्नशिप की व्यवस्था हो। रोजगार आधारित करिअर काउंसलिंग शुरू हो। शिक्षा विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले में शीघ्र ही आधुनिक और तकनीकी शिक्षा का ढांचा खड़ा नहीं किया गया, तो प्रतिभाशाली छात्रों का पलायन तेज होगा।