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सिसकियों से टूट रहा सन्नाटा

Fri, 29 Apr 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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हादसा - फोटो : अमर उजाला
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पीड़ितों को दर्द झुलसने का नहीं बल्कि आंखों के सामने हुए हादसे में अपनों को खो देने का है। रफीपुर गांव में बुधवार को गैस सिलेंडर फटने के बाद लगी भीषण आग ने आठ लोगों को लील लिया था। अंतिम संस्कार के समय अपनों को खोने वालोें के साथ मौके पर मौजूद लोगों की आंखों से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे थे।
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रफीपुर के लल्लाराम के घर लगी आग का कोहराम जहांगीराबाद, लखनऊ सहित चार गांवों तक पहुंच गया। इन सभी जगहों पर पसरा सन्नाटा सिसकियों से टूट रहा था। करुण क्रंदन ऐसा कि राह चलते लोग भी ठिठक जा रहे थे।

रफीपुर, दारापुर, गड़रियनपुरवा व लखनऊ की सिमरा गौड़ी कॉलोनी में इस खौफनाफ मौत का मंजर याद कर लोग सिहर उठते हैं। सभी नम आंखों से एक-दूसरे को ढांढस बंधा रहे हैं।
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रफीपुर में बुधवार को हुए हादसे के दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। हादसे वाला लल्लाराम का घर शांत पड़ा था। घर के सारे सदस्य सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों के पास थे। प्रवेश के घर पर कोहराम मचा था। प्रवेश की पत्नी गीता रो-रोकर बदहवास हो रही थी।

आखिर उसके दोनों बच्चे खुशी (4) व विवेक (2) अब इस दुनिया को अलविदा जो कर चुके थे। अंतिम संस्कार के बाद से ही गीता अचेत हो गई। होश में आने पर पति को कभी झिंझोरती तो कभी पड़ोस के लोगों से पूछती कि वे किसका मुंह देखकर जिएंगे।

गांव गुड़ियनपुरवा में प्रताप के घर सन्नाटा पसरा था। यहां से मामा की शादी में गई सोनम (4) व आदित्य (5) अब इस दुनिया में नहीं है। इस हादसे से दोनों मृत बच्चों की मां व दूल्ले लल्लाराम की बहन रानी, उसकी अन्य दो बेटियां रोशनी (6), रोली (8) और भतीजी ममता (16) अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही हैं।

बुधवार देर रात में दोनों बच्चों के शवों का परिवारीजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। सुबह प्रताप के घर आदित्य के साथ खेलने वाले मासूम बच्चे प्रताप के घर आकर खड़े थे। आखिर आदित्य को क्या हुआ, यह बताने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
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