जैदपुर। सरकारी फाइलों में अगर एक बार किसी जीवित इंसान पर मृत्यु का ठप्पा लग जाए तो खुद को जिंदा साबित करने में पूरी उम्र बीत जाती है। जैदपुर के कोला गांव की संगीता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
उन्होंने खुद को जीवित साबित करने के लिए करीब 22 साल तक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार सरकारी तंत्र ने सरकारी संगीता को जिंदा मान लिया है।
मंगलवार का दिन संगीता के जीवन में एक नई उम्मीद लेकर आया। गांव में आयोजित विशेष पंचायत बैठक में उन्हें न्याय मिला। पंचायत की चौपाल में एडीओ पंचायत राजेंद्र प्रसाद, ग्राम सचिव रेखा चौधरी, प्रभारी प्रशासक बंशीलाल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। जैसे ही संगीता पंचायत के सामने आईं, गांव की बुजुर्ग महिलाओं और ग्रामीणों ने एक स्वर में उन्हें पहचान लिया। ग्रामीणों की इस गवाही के बाद पंचायत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कागजों में सुधार किया और उन्हें परिवार रजिस्टर में संगीता का नाम पुन: जीवित मान दर्ज कर लिया।
मामले की जांच में सामने आया कि 22 वर्ष पूर्व उनके पति अचानक लापता हो गए थे। इसके बाद संगीता ने दूसरा विवाह कर लिया था। उनके विवाह करने के कुछ दिनों बाद गांव में अफवाह फैल गई कि संगीता की भी मौत हो गई। इसी के चलते प्रशासनिक स्तर पर त्रुटिवश उन्हें मृत मान लिया गया था।
इस दौरान संगीता को कई तरह की परेशानिया उठानी पड़ी। तहसील स्तर पर हुई इस चूक को दुरुस्त कराने के लिए संगीता लगातार अधिकारियों व कर्मचारियों के चक्कर लगाती रही लेकिन कही पर भी मामले की सुनवाई नहीं हुई। मंगलवार को हुई बैठक में न केवल सरकारी दस्तावेज में उन्हें जीवित दर्ज किया गया बल्कि परिवार रजिस्टर में उनके दूसरे विवाह का सही उल्लेख भी जोड़ दिया गया।
हरख के एडीओ पंचायत राजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि भूलवश महिला को कागजों पर मृत दर्ज कर दिया गया था। साक्ष्यों और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर अब उन्हें परिवार रजिस्टर में पुन: जीवित दर्ज कर लिया गया है। (संवाद)