बाराबंकी। बाजारों में मिलावटी आटे और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। लाखोें का जुर्माना लगाए जाने के बाद भी मिलावटी खोरी रुक नहीं रही है। डीएम के आदेश पर अभियान तो चलाया जाता है लेकिन वह सिर्फ औपचारिकता तक ही सीमित रहता है। यही वजह है कि मिलावटखोर पूरी तरह से सक्रिय हैं। रक्षाबंधन को देखते हुए इनकी तैयारियां और तेज हो गई हैं।
मिलावटखोर बेखौफ होकर अपने धंधे को अंजाम दे रहे हैं। आटे में अक्सर सस्ता अनाज, चोकर या मिट्टी मिलाई जा रही है। दूध, मसाले, तेल और मिठाइयों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट हो रही है।
यह मिलावट सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका विशेष रूप से बुरा असर पड़ रहा है।
मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां, लीवर की समस्या और अन्य गंभीर रोग हो सकते हैं। प्रशासन की ढिलाई के कारण मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिलना मुश्किल हो गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई केवल नमूने लेने तक सीमित है। बड़े मिलावटखोरों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है।