बाराबंकी। शहर के जीआईसी मैदान में राष्ट्रीय एकता विकास संस्था की ओर से आयोजित राष्ट्रीय हस्तशिल्प एवं विकास प्रदर्शनी मेला आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मेले में अलग-अलग जिले से आए कारीगर, बुनकर और व्यापारी अपने-अपने पारंपरिक एवं आधुनिक उत्पाद लेकर आए हैं।
खासतौर पर हथकरघा से तैयार वस्त्र, रेडीमेड गारमेंट्स, सूती एवं सिल्क परिधान, डिजाइनर साड़ियां, ड्रेस मटेरियल, बेडशीट, हैंडलूम कपड़े, कुर्ते और बच्चों के परिधानों की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
मेले में हस्तनिर्मित गारमेंट्स की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बारीक कारीगरी, प्राकृतिक धागों का उपयोग और पारंपरिक बुनाई शैली है, जो इन्हें मशीन से बने कपड़ों से अलग और विशिष्ट बनाती है। ये कपड़े न केवल देखने में आकर्षक हैं, बल्कि अधिक टिकाऊ, और मौसम के लिहाज से भी बेहतर माने जाते हैं।
हथकरघा उत्पादों में स्थानीय कारीगरों की मेहनत और कला की झलक साफ दिखाई देती है, जिससे हर उत्पाद अपने आप में अनूठा बन जाता है। शाहजहांपुर से आए व्यापारी अजय गुप्ता ने बताया कि सभी गारमेंट्स पूरी तरह हथकरघा और पारंपरिक बुनाई से तैयार किए गए हैं।
मुरादाबाद से आए व्यापारी बिट्टू कहना है कि हस्तनिर्मित वस्त्रों की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। युवा वर्ग भी अब पारंपरिक और इको-फ्रेंडली फैशन की ओर आकर्षित हो रहा है। सीतापुर से आए व्यापारी हुसैन का कहना है कि लोग आजकल मशीन के मुकाबले हैंडलूम उत्पादों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि इनमें गुणवत्ता के साथ-साथ आराम भी मिलता है। सबसे खास बात यह है कि हर डिजाइन यूनिक होता है और बड़ी मेहनत से तैयार किया जाता है।