टिकैतनगर (बाराबंकी)। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर मूर्तिहन घाट पर चल रहे तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महा महोत्सव के दूसरे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। सुबह भगवान शिव का भव्य अभिषेक हुआ तो वेदों की ऋचाओं, शंखनाद और घंटों की गूंज से मंदिर परिसर गूंज उठा। दोपहर में ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे संग धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई।
सोमवार सुबह 101 पवित्र कलशों में भरे गए सरयू जल, दूध, दही, घृत, शहद एवं गंगाजल से भगवान गुप्तेश्वर महादेव का महा अभिषेक हुआ। अयोध्या, वृंदावन और वाराणसी से आए प्रतिष्ठित विद्वान आचार्यों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने विधिवत महादेव का स्नान, पुष्पार्चन और जलाभिषेक किया। प्रवचन में डॉ. महीधर शुक्ल महाराज ने कहा कि शिव केवल देव नहीं, चेतना हैं। प्राण प्रतिष्ठा केवल प्रतिमा में नहीं, हमारे अंतर में शिव तत्व की स्थापना है। जब मन में श्रद्धा और कर्म में संयम होता है, वहीं से शिवत्व की शुरुआत होती है। कहा कि हमें मंदिरों को केवल पूजा स्थली नहीं, संस्कार केंद्र के रूप में विकसित करना होगा।
अपरान्ह तीन बजे रथ पर विराजमान भगवान गुप्तेश्वर की झांकी के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान भक्ति गीतों, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जयघोषों से पूरा माहौल शिवमय हो उठा। शोभायात्रा लोधेश्वर महादेव मंदिर, कुंतेश्वर धाम, पक्का तालाब शिव धाम, भुवनेश्वर नाथ मंदिर व रानी मऊ कुटी भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। शोभायात्रा में भगवान शिव-पार्वती, नंदी, शिव तांडव, योगेश्वर स्वरूप की झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पानी व प्रसाद वितरण किया।