बाराबंकी। मनरेगा के तहत जॉब कार्डधारकों को गांवों में कार्य नहीं मिल रहा है। कार्य पाने के लिए मजदूर धक्के खा रहे हैं और ग्राम प्रधान पंचायत चुनाव नजदीक देख सिर्फ अपने चहेतों को ही कार्य दे रहे हैं। जिससे कार्य पाने और परिवार चलाने के लिए मजदूर शहरों में आकर मजदूरी करने को विवश हैं। जिले में मनरेगा जॉब कार्डधारकों की संख्या करीब ढाई लाख के आसपास है, लेकिन कार्य लगभग डेढ़ लाख जॉब कार्डधारकों को ही मिला है। ऐसे में करीब एक लाख जॉब कार्डधारक कार्य पाने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं और गांवों में इन्हें कार्य नहीं मिल रहा है। जॉब कार्डधारकों का कहना है कि पंचायत चुनाव नजदीक आ गया है इसलिए ग्राम प्रधान उन्हीं लोगों का कार्य मुहैया कराते हैं जो उनके खास हैं जिससे हम लोगों को शहर में आकर मजदूरी करना पड़ रहा है। छाया चौराहा, सतरिख नाका और पैसार नाके पर प्रतिदिन लगने वाली मजदूरों की मंडी इस बात को बयां कर रही है कि, इन मजूदरों को गांव में कार्य नहीं मिलता है जिसकी वजह इन्हें शहर को आना पड़ता है। जबकि मनरेगा योजना ही इसलिए शुरू की गई थी कि, मजदूरों को गांव में कार्य मिल सके जिससे कार्य की खोज में उन्हें शहर न आना पड़े लेकिन यह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। इस बाबत डीडीओ एके सिंह का कहना है कि, जॉब कार्डधारकों को गांव में कार्य उपलब्ध कराने के निर्देश सभी खंड विकास अधिकारियों को दिए गए हैं।