बाराबंकी। मुख्यमंत्री के दखल के बाद साइकिल सवार दो लोगों को रौंदने वाली नीली बत्ती लगी कार के मालिक पर केस दर्ज कर लिया गया है। हादसा दिवाली वाले दिन रामसनेहीघाट कोतवाली क्षेत्र में हाईवे पर हुई थी। पुलिस ने कार बरामद कर ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। पहले तो पुलिस इस मामले की लीपापोती में जुटी थी लेकिन शनिवार देर शाम सीएम के हस्तक्षेप के बाद वाहन स्वामी अजीत प्रताप पर केस दर्ज कर लिया गया। अजीत लखनऊ के विनीत खंड गोमती नगर का रहने वाला है। अजीत को एआईजी स्टांप का रिश्तेदार बताया जा रहा है। उसी की आड़ में अजीत नीली बत्ती लगाकर घूमता है। इसी दबाव के चलते पुलिस इस मामले में कार्रवाई से कतरा रही थी।
दिवाली वाले दिन बृहस्पतिवार को रामलालपुर राजपुर निवासी रामसमुझ और रामकुमार साइकिल से लौधी सिंह पुरवा पालेसर जा रहे थे। इसी दौरान फैजाबाद से लखनऊ की ओर जा रही नीली बत्ती लगी तेज रफ्तार कार नंबर यूपी 32 डीजेड 8658 ने पीछे से रौंद दिया। रामसमुझ की मौकेपर ही मौत हो गई जबकि रामकुमार उछलकर उसी कार पर जा गिरा। करीब तीन किमी दूर टोल प्लाजा के बूथ नंबर पांच पर कार रुकी तो वह कार से गिर गया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, कार चालक फरार हो गया। रामकुमार को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
घायल रामकुमार गाड़ी पर लटका था, मालिक ने कहा-और तेजी से चलाओ कार
कोतवाल रामसनेहीघाट राजीव कुमार सिंह ने बताया कि वाहन चालक अरुण कुमार निवासी अवांव, थाना मुबारकपुर जिला आजमगढ़ को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसने बताया कि गाड़ी में बैठे वाहन स्वामी अजीत प्रताप ने घायल को कार की छत से लटकते हुए देखने के बाद भी तेजी से कार ले चलने को कहा था।
बरामदगी के समय हटा दी नीली बत्ती
ड्राइवर अरुण ने पुलिस पूछताछ में बताया कि बरामदगी के समय कार की नंबर प्लेट और नीली बत्ती हटा दी गई थी। देर शाम एसपी कार्यालय से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि इस मामले में दर्ज अभियोग में वाहन स्वामी अजीत का नाम बढ़ाते हुए उसके व वाहन चालक अरुण कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास, हत्या की साजिश के साथ एमवी एक्ट की धारा 177 के तहत कार्रवाई की जा रही है।