बाराबंकी (ब्यूरो)। जिले के पांच कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बिना वाॅर्डन के ही संचालित हो रहे हैं। जिससे इन विद्यालयाें में शिक्षण कार्य व व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि आवेदन आने के बाद भी इन पदों पर वाॅर्डन का चयन नहीं किया जा रहा है।
जिले में 15 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का संचालन किया जा रहा। इनमें से सिरौलीगौसपुर, निंदूरा, देवां, हैदरगढ़ समेत पांच विद्यालय ऐसे हैं जिनमें वाॅर्डन की तैनाती नहीं की जा सकी है। जिससे इन विद्यालयों में शिक्षण व व्यवस्था का कार्य प्रभावित हो रहा है। मालूम हो कि जिन बालिकाओं ने बीच में ही शिक्षण छोड़ दिया हो या फिर गरीब परिवार की ऐसी बालिकाएं जो शिक्षा से वंचित रही हो। उन विद्यालय की बालिकाओं को कस्तूरबा विद्यालयों में दाखिला दिलाकर शिक्षा दिलाई जाती है। लेकिन विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि पांच ऐसे विद्यालय हैं जिनमें वाॅर्डन की तैनाती नहीं की जा सकी है। यहीं नहीं इन विद्यालयों में करीब 23 शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा चुतर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भी तैनाती नहीं हो सकी है। इन सबके बावजूद कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने वाली बालिकाओं को बेहतर और गुणवत्तापरक शिक्षा दिए जाने का दावा किया जा रहा है। जबकि इन विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने वाली बालिकाओं को इस बात की शिकायत भी की और अधिकारियों को यहां तक बताया कि विद्यालयों में शिक्षण का कार्य बेहतर नहीं है इसके बावजूद अधिकारियों ने इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। जिसके चलते छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है।