मसौली (बाराबंकी)। राज्य एवं तेरहवें वित्त आयोग से मिले धन का ग्राम पंचायतों में बंदरबांट किए जाने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान बिना अनुमति के ही स्ट्रीट लाइटें लगवाकर विद्युत विभाग को हजारों रुपये का चूना लगा रहे है। आरोप है कि एक हजार रुपये कीमत वाली स्ट्रीट लाइट 3,650 रुपये में खरीद डाली गई। जानकारी के बाद बिजली विभाग ने एक ग्राम पंचायत के खिलाफ कार्रवाई की है। वहीं डीपीआरओ ने भी कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र भेजा है।
मसौली ब्लॉक में 2012-13 में राज्य वित्त व तेरहवें वित्त आयोग से ग्राम प्रधान व सचिवों के खातों में एक करोड़ से अधिक धनराशि भेजी गई। इससे क्षेत्र की 48 ग्राम पंचायतों में करीब 24 सौ स्ट्रीट लाइट तो लगवा डाली गईं पर ब्लॉक मुख्यालय मेें स्ट्रीट लाइट की खरीद का कोई अभिलेख पंचायत सचिवों ने नहीं जमा किया है। सूत्रों की मानें तो यह स्ट्रीट लाइटें तीन हजार रुपये से लेकर 3650 रुपये तक खरीदी गईं। जबकि एक स्ट्रीट लाइट की कीमत एक हजार से 14 सौ रुपये तक बताई जाती है। जबकि निर्देश हैं कि राज्य वित्त व तेरहवें वित्त आयोग का धन गांवों में शौचालयों की मरम्मत, जलापूर्ति, तालाब की सफाई, नाली निर्माण व अन्य कार्यों में खर्च किया जाए। लेकिन पंचायत सचिवों ने प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए स्ट्रीट लाइटें लगवा दीं। शिकायतों के बाद भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।