कागजों पर ही ट्रिंगरिंग टीमें कर रही ग्रामीणों को जागरूक
- जागरूकता के लिए 77 टीमों को किया गया है तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। ओडीएफ को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए लाखों रुपये प्रशिक्षण पर खर्च किए जाने के बाद भी इसका कोई रिजल्ट सामने नहीं आ रहा है। जागरूकता के लिए प्रशिक्षण लेने वाली टीमें गांव-गांव जाने के बजाय घर पर ही बैठ रही है। इसका खुुलासा तब हुआ जब गत दिनों हरख ब्लॉक के एक गांव का औचक निरीक्षण कर प्रभारी डीपीआरओ आशुतोष कुशवाहा ने ट्रिंगरिंग टीमों का हाल जाना। जिसमें टीमों की लापरवाही सामने आने पर ब्लॉक के एडीओ पंचायत हितेंद्र पाल पर कार्रवाई करते हुए जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया था।
बताते चलें कि केंद्र सरकार खुुले में शौच मुक्त अभियान को सफल बनाने के लिए पंचायती राज विभाग को भारी भरकम बजट उपलब्ध कराता है। ग्रामीणों को घर में शौचालय निर्माण कराने के प्रति प्रेरित करने के लिए अब तक करीब 77 ट्रिंगरिंग टीमों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षण के दौरान लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन प्रशिक्षण के बाद यह टीमें गांव-गांव जाकर अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रही है। जिससे केंद्र सरकार की मंशा पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है। जिस प्रकार से प्रभारी डीपीआरओ द्वारा औचक निरीक्षण में टीमों की सच्चाई की पोल खुुली है। उसी प्रकार हैदरगढ़, सिद्धौर, त्रिवेदीगंज समेत कई अन्य ब्लॉकों के गांवों में भी यह हाल है। हालांकि अधिकारी जल्द ही औचक निरीक्षण कर इसकी हकीकत जानने की बात कह रहे हैं।
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जल्द ही औचक निरीक्षण कर टीमों के कार्यों की समीक्षा की जाएगी। लापरवाही करने वाली टीमों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
- आशुतोष कुशवाहा, प्रभारी डीपीआरओ