बाराबंकी। जिले में बीते एक साल के दौरान दुष्कर्म और शारीरिक शोषण के मामलों में पीड़िताओं के बयान से पलट जाने की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। साल भर में करीब 60 पीड़िताओं और गवाहों के अदालत में बयान से मुकर जाने के कारण कई आरोपी बरी तक हो चुके हैं। हालांकि कई मामलों में पीड़िताओं को एससी-एसटी एक्ट के तहत सरकारी आर्थिक मदद भी मिली है।
महिला अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए शासन स्तर से निर्देश है कि दुष्कर्म या उत्पीड़न से जुड़े हर केस में थाना स्तर से तत्काल कार्रवाई हो। नक्शा नजरी बना कर आरोप पत्र दाखिल करने में भी देरी न हो। नाबालिगों से जुड़े पॉक्सो एक्ट वाले मामलों की तो पुलिस मॉनिटरिंग सेल अलग से निगरानी भी करती है। इसके बावजूद केस की सुनवाई के दौरान अंतिम समय पर आरोप लगाने वाली कई महिलाएं कोर्ट में अपने बयान से पलट जाती है।
अभियोजन विभाग के जिम्मेदार बताते हैं किर औसतन हर माह छह से सात केस ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें पीड़िता या गवाह बयान से पलट जाते हैं। अगस्त माह में ही छह मामलों में महिलाएं ट्रायल के दौरान मुकर गईं। कहीं पीड़िता ने कहा कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई, तो कहीं वादी ने हाथ पीछे खींच लिए। कई मामलों में गवाह पक्ष ही मुकर गया। अभियोजन के संयुक्त निदेशक नागेश दीक्षित ने बताया कि जिन मामलों में गवाह मुकरते हैं, उनमें प्रकीर्ण वाद दर्ज कराया गया है। कोर्ट में गलत बयान देने पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
वादी मुकदमा, पीड़िता व भाई तक मुकरे
वर्ष 2018 में सफदरगंज क्षेत्र के एक गांव निवासी ने मो. जुबेर पर अपनी भतीजी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने पुलिस से तो दुष्कर्म की बात कही मगर सुनवाई के दौरान मुकर गई। कहा कि घटना के समय वह बेहोश थी। जिरह के दौरान वादी मुकदमा ने बताया कि उसने कुछ लोगों के बताने के अनुसार तहरीर दी थी। दो भाइयों ने भी घटना होने से इनकार किया। इस कारण पांच अगस्त 2025 को आरोपी कोर्ट से दोषमुक्त हो गया।
दुष्कर्म से हुए गर्भधारण का आरोपी भी बरी
टिकैतनगर क्षेत्र के एक गांव के वादी ने केस दर्ज कराया था कि गांव निवासी रिंकू ने अकेला पाकर पुत्री से दुष्कर्म किया। 13 फरवरी 2014 को पीड़िता को गर्भ ठहरने की जानकारी हुई। सुनवाई के दौरान वादी मुकदमा, पीड़िता तथा उसका एक भाई बयान से मुकर गए। साक्ष्य व गवाही के आधार पर 13 जून 2024 को कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त माना।