बेसलाइन सर्वे में छूटे एक लाख 11 हजार परिवारों को जल्द ही शौचालय निर्माण के लिए धनराशि आवंटित की जाएगी। प्रमुख सचिव पंचायती राज द्वारा आला अफसरों को दिए गए निर्देश के बाद गुरुवार को जिले भर के बीडीओ व सचिवों को बुलाकर तेजी के साथ शौचालय का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए। शौचालय निर्माण का भुगतान पंचायती राज विभाग के सूचना, शिक्षा व प्रचार-प्रसार मद में पड़ी करोड़ों की धनराशि से कराया जाएगा।
गौरतलब है कि 2012 में हुए बेसलाइन सर्वे की सूची के अनुसार जिले में करीब साढ़े तीन लाख परिवारों के घरों में शौचालयों का निर्माण कराया गया था। शासन के निर्देश पर बेसलाइन सर्वे में छूटे परिवारों को शामिल करने के लिए दोबारा सर्वे कराया गया था।
इसमें एक लाख 11 हजार 157 पात्र चिह्नित किए गए थे लेकिन सरकार द्वारा शौचालय निर्माण के लिए धनराशि न दिए जाने से इनका निर्माण अटका था। पंचायती राज के प्रमुख सचिव द्वारा वीसी के माध्यम से दिए गए निर्देश के बाद शौचालयों का निर्माण पंचायती राज विभाग के सूचना, शिक्षा व प्रचार-प्रसार (आईसीई) के मद से कराए जाने के निर्देश मिले हैं।
तेजी के साथ छूटे पात्रों के शौचालयों का निर्माण कराने के लिए मुख्य विकास अधिकारी मेधा रूपम ने गुरुवार को दो शिफ्टों में ब्लॉकवार सभी सचिवों व बीडीओ के साथ बैठक की और रणनीति तैयार कराई। इस दौरान सभी को निर्देश दिए गए कि तेजी के साथ अधिकारी व कर्मचारी शौचालय निर्माण को पूर्ण कराएंगे।
सर्वे में छूटे मिले एक लाख 11 हजार परिवारों को लाभान्वित करने के लिए पंचायती राज विभाग पहले से ही इनका निर्माण बिना पैसे के ही कराए जाने का दावा कर रहा है। विभाग का कहना है कि तीन हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण करा दिया गया है।
लोक सभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही शौचालयों का निर्माण कराने की तैयारी की गई है ताकि छूटे पात्रों को इसका लाभ दिया जा सके। पूर्व की तरह की युद्ध स्तर पर इनके निर्माण की मॉनीटरिंग के लिए नोडल अफसरों की जवाबदेही तय की गई है।
विभाग में प्रचार-प्रसार के मद में दो करोड़ से अधिक की धनराशि खाते में पड़ी हुई है। इस धनराशि से पंचायतों में स्वच्छता का प्रचार-प्रसार करना था। अब इस धनराशि से कुछ हद तक शौचालयों का निर्माण होने का दावा अफसर कर रहे हैं।
डीपीआरओ अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि प्रमुख सचिव के निर्देश पर छूटे पात्रों के शौचालयों का निर्माण कराने की कवायद की जा रही है। निर्माण का पैसा आईसीई मद से कराया जाएगा। सभी सीडीओ की ओर से निर्देश दिए गए हैं।