बिना सुरक्षा इंतजामों के मजदूरों से लिया जा रहा काम
बाराबंकी। मिल व फैक्ट्री में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को दर किनार कर कार्य कराया जा रहा है जिससे कभी कोई हादसा होने पर मजदूरों की जान जोखिम में पड़ सकती हैं। यहीं नहीं ऐसी स्थित में इनके इलाज के लिए भी जिला अस्पताल में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। अधिकारियों की अनदेखी का खामियां मजदूूरों को भुगतना पड़ सकता है।
जिले में हैदरगढ़ चीनी मिल, कुर्सी में अमरून फूड समेत करीब आधा दर्जन फैक्ट्रियां हैं जिनमें मशीनरी से लेकर कंप्रेशर से संबंधित कार्य होते हैं। वहीं 25 कोल्डस्टोरेज हैं। जिनमें अमोनिया गैस टैंक की यूनिट स्थापित है। अमरून फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सिर्फ एक जोड़ी जूते व ड्रेस मिली है। हेल्मेट, कटर के पास काम करने वाले मजदूरों को ग्लबस तक नहीं दिए जा रहे हैं। क्षेत्र के ही सोना गोल्ड फैक्ट्री में मुर्गी दाना बनता है। यहां पर करीब 200 से अधिक मजदूर कार्य करते हैं। मुकेश, रिंकू, प्रदीप, संतराम आदि ने बताया कि ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे हैं। बड़ी बड़ी मशीनों से कार्य होने के बावजूद सुरक्षा किट नहीं मिलती है। चोट लगने पर फैक्ट्री के बाहर निजी डॉक्टर से इलाज कराना पड़ता है। ठेकेदारों के माध्यम से लगे मजदूरों को श्रम विभाग में पंजीकरण तक नहीं हुआ है। हैदरगढ़ चीनी मिली के जीएम योगेश सिंह ने बताया कि मिल में एंबुलेंस से लेकर डॉक्टर, दवाएं व सभी सुरक्षा किट उपलब्ध है। मिल में रखे कंप्रेशर टैंक की हर सीजन पर बायॅलर इंस्पेक्टर से जांच कराई जाती है।
एडीएम अनिल कुमार सिंह का कहना है कि, रायबरेली हादसे को देखते फायर विभाग को पत्र लिखा गया है कि वह सभी फैक्ट्रियों में जाकर उपकरण, सुरक्षा व्यवस्था आदि की जांच करें। व्यापारियों से भी कहा गया है कि वह फैक्ट्री व अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा के समस्त इंतजाम रखे।