बाराबंकी। ग्राम पंचायतों की आरक्षण सूची जारी होने के बाद आपत्तियां आने का सिलसिला जारी है। दूसरे दिन ब्लॉकों पर जहां 27 आपत्तियां दर्ज कराई गईं। वहीं 14 आपत्तियां डीपीआरओ कार्यालय पर आईं। इनमें सभी शिकायतें ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के लिए किए गए आरक्षण को लेकर आ रही हैं। आठ मार्च तक आने वाली शिकायतों का निस्तारण 12 मार्च को गठित कमेटी द्वारा किया जाएगा।
ब्लॉक मसौली के ग्राम बांसा निवासी वाहिद अली ने दर्ज कराई आपत्ति में कहा है कि ग्राम पंचायत बांसा को नियम के विरुद्ध ओबीसी वर्ग में आरक्षित कर दिया गया है। जबकि नियमानुसार इसे अनारक्षित में होना चाहिए था। इसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत भयारा निवासी अरविंद कुमार वर्मा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उनकी ग्राम पंचायत को अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षित किया गया है। जबकि 2015 में यह सीट महिला तो उससे पहले अनारक्षित थी। किस फार्मूले पर ग्राम पंचायत को आरक्षित किया गया है।
फतेहपुर ब्लॉक के ग्राम इब्राहिमपुर निवासी अनिल वर्मा ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुुए बताया कि 2011 की जनगणना में उनके गांव की अनुसूचित जाति की आबादी 380 दिखाई गई है, जबकि ग्राम सभा में इनकी संख्या 168 है। बिना जांच के ही ग्राम पंचायत को एससी के लिए सुरक्षित कर दिया गया।
ग्राम पंचायत ढड़वा गदमानपुर निवासी मालती देवी ने बताया है कि जनगणना 2011 के अनुसार ग्राम पंचायत की जनसंख्या 1297 और एससी की आबादी 340 दिखाया गया है। जबकि कुल आबादी 1328 है जिसमें एससी की आबादी 454 है। सही आंकड़ों के तहत आरक्षण किया जाए।
ग्राम पंचायत जुख़ोर निवासी पृथ्वी पाल ने बताया कि गांव में सामान्य व एससी वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग के स्थार पर ग्राम पंचायत का आरक्षण अनारक्षित या एससी की जाए। इसी ब्लॉक के ग्राम गांगेमऊ निवासी सरोज कुमार ने बताया कि एससी वर्ग के लिए उनके गांव की सीट आरक्षित हुई है। जबकि गांगेमऊ की अनुसूचित जाति की जो जनसंख्या ली गई है उसमें गांगेमऊ, रैचन मऊ व इब्राहिमपुर शामिल है। इस प्रकार दूसरे दिन सिद्धौर, हरख, बनीकोडर, फतेहपुर, दरियाबाद, मसौली, सूरतगंज, बंकी और डीपीआरओ कार्यालय पर आपत्तियां आईं।