धरती पर भगवान का स्वरूप हैं माता-पिता: रामनरेश
- 23वें जनक जननी महोत्सव में गुरु व माता-पिता का किया पूजन
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अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। धरती पर भगवान स्वयं माता-पिता के रूप में मौजूद हैं। इनकी सेवा का प्रताप ही है जो जीवन में आने वाले बड़े से बड़े कष्टों से उबरने की शक्ति देता है। मानव जाति को पितृ ऋण, गुरु ऋण व देव ऋण अवश्य उतारने चाहिए। इसके बाद ही मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है। ये विचार 23वें जनक जननी महोत्सव एवं मातृ-पितृ पूजन समारोह में बछरावां के विधायक राम नरेश रावत ने व्यक्त किए।
सफदरगंज स्थित पारिजात युवक समिति में आयोजित कार्यक्रम में विधायक ने कहा कि, हमें जो प्रकृति से निशुल्क मिलता है वह देव ऋण है, इसीलिए मानव जाति का कर्तव्य है कि प्रकृति से खिलवाड़ न करें। माता-पिता के बाद अगर कोई देता है वह गुरु है, गुरु ही विकास का रास्ता दिखाता है। पृथ्वी पर जीवित सबसे बड़े भगवान माता-पिता हैं। कार्यक्रम में विधायक ने अपने गुरु भगवान वत्स का पूजन किया। इसके बाद विधायक के पुत्रों ने उनका व माता का पूजन किया। कार्यक्रम में तमाम पुत्रों ने अपने-अपने माता-पिता की पूजा कर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. भगवान वत्स ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि मेरे पुत्र तुल्य शिष्य ने विकास कर मुझे संपूर्ण भारत का भ्रमण करा दिया है। उनके संस्कार ही हैं जो ऐसा कार्यक्रम कराने में श्रद्धा रखते हैं। पूर्व मंत्री संग्राम सिंह वर्मा व कोआपरेटिव चेयरमैन धीरेंद्र वर्मा, संतोष सिंह, पूर्व विधायक राजाराम त्यागी ने भी विचार व्यक्त किए। इसके बाद विधायक रामनरेश रावत ने सभी माता-पिता को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि अब रायबरेली व लखनऊ में जनक जननी महोत्सव मनाया जाएगा। इस मौके पर पूर्व एमएलसी राजा राकेश प्रताप सिंह, विनय कुमार, गुलाब सिंह आदि मौजूद रहे।