घट रही घाघरा, मगर गांवों के हालात जस के तस
बाराबंकी। घाघरा नदी का पानी भले ही धीरे-धीरे घट रहा हो, लेकिन नदी के पानी से डूबे गांवों के हालात जस के तस बने हुए हैं।
घरों में पानी भरा होने की वजह से तराई के लोग ऊंचे स्थानों और मचानों पर जीवन गुजार रहे हैं। वहीं, जिलाधिकारी के आदेश पर रविवार को एसडीएम सिरौलीगौसपुर में बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण कराया।
घाघरा नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 13 सेमी ऊपर है। नदी का पानी भले ही सात सेमी घटा हो लेकिन तटबंध कटने से जिन गांवों में पानी भरा है वहां के हालात जस के तस बने हुए हैं।
तराई के तमाम परिवार चोरी होने के डर से गृहस्थी छोड़कर जाना नहीं चाह रहे हैं। घरों में पानी भरा होने के बाद भी ये लोग ऊंचे स्थानों और मचानों पर परिवारीजनों के साथ गुजर-बसर कर रहे हैं।
एल्गिन चरसड़ी तटबंध कटने के बाद से नैपुरा गांव तो पूरी तरह से खाली हो गया है। मांझा रायपुर, नवनपुरवा, परसावल, चरपुरवा और पारा बेहटा गांव के ज्यादातर लोग बंधे पर आ गए हैं और परिवारीजनों के साथ तिरपाल के नीचे बंधे पर जीवन गुजार रहे हैं।
जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी के आदेश पर रविवार को एसडीएम सिरौलीगौसपुर ने बंधे पर जीवन गुजार रहे करीब 550 लोगों में राहत सामग्री का वितरण कराया है।
सुढ़ियामऊ प्रतिनिधि के मुताबिक, उपजिलाधिकारी रामनगर अभय कुमार पांडेय ने रविवार को बाढ़ प्रभावित हेतमापुर, कंचनापुर, सरसंडा और सुंदरनगर गांव का जायजा लिया। ये सभी गांव पानी से घिरे हुए हैं।
एसडीएम ने मौके पर मौजूद राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को नदी के जलस्तर पर नजर रखने के साथ ही बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद को तैयार रहने के आदेश दिए हैं।
एडीएम संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि, छह गांवों में पानी भरने के बाद ज्यादातर लोग बंधे पर आ गए हैं। रविवार को एसडीएम सिरौलीगौसपुर को मौके पर भेजकर राहत सामग्री का वितरण कराया गया है। बाढ़ पीड़ितों की यथासंभव मदद की जा रही है। वहीं, नदी का पानी धीरे-धीरे घट रहा है।