दोबारा गैस लेने नहीं पहुंचे उज्ज्वला योजना के 50 प्रतिशत लाभार्थी
65 हजार परिवारों को दिए गए गैस कनेक्शन, 25 हजार परिवार अभी भी वंचित
सूची में खामियों से अपात्रों को भी मिला योजना का लाभ
लाभार्थी बोले, नहीं मिली सब्सिडी तो दोबारा कैसे भराएं गैस
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। प्रधानमंत्री की बहुचर्चित उज्ज्वला योजना के तहत जिले के 65 हजार गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन 50 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो दोबारा गैस लेने एजेंसी पर नहीं पहुंचे। एजेंसी संचालक भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। वहीं जिन्हें गैस कनेक्शन मिला है उनका भी कहना है जो सिलेंडर दिए गए हैं उस पर सब्सिडी नहीं दी जा रही है। ऐसी स्थिति में नकद गैस भरा पाना संभव नहीं है। इसलिए ज्यादातर चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है।
उज्ज्वला योजना के तहत वर्ष 2011 में सामाजिक व आर्थिक जनगणना बीपीएल सूची से घरेलू गैस कनेक्शन देने के लिए जिले में करीब 90 हजार परिवारों को चिन्हित किया गया है। इनमें से अभी तक करीब 65 हजार परिवारों को योजना के तहत निशुल्क घरेेलू गैस कनेक्शन दिए गए हैं। 25 हजार परिवार ऐसे हैं जिन्हें योजना का लाभ दिया जाना है। लेकिन जिन परिवारों को योजना से लाभान्वित किया गया है वह भी इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। एजेंसी संचालकों की मानें तो योजना का लाभ पाने वालों में से करीब 50 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो दोबारा गैस लेने के लिए एजेंसी पर नहीं गए।
केस एक
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टिकैतनगर क्षेत्र के वसौली निवासी रामशेखर की पत्नी पुष्पा बताती हैं चार माह पूर्व योजना के तहत जो गैस सिलेंडर मिला था वही अभी खत्म नहीं हुआ है। वह कहती हैं कि बहुत जरूरी होता है तभी गैस सिलेंडर पर खाना बनाया जाता है नहीं तो चूल्हे पर ही खाना बना लिया जाता है। खेमापुर निवासी रामचन्द्र की पत्नी रेखा बताती हैं कि योजना के तहत करीब चार माह पहले मुफ्त में गैस सिलेंडर मिला था लेकिन उसका प्रयोग कम करते हैं इसलिए वह अभी खत्म नहीं हुआ है। दोपहर और शाम का खाना तो चूल्हे पर ही बनता है।
बाक्स
केस दो
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हैदरगढ़ क्षेत्र के मवैया निवासी गंगादीन की पत्नी जगदेई ने बताया कि करीब चार माह पूर्व उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में एक गैस सिलेंडर मिला था जो कुछ दिन पूर्व खत्म हो गया है। कहा कि सब्सिडी का पैसा न मिलने की वजह से आठ सौ रुपये देकर भराना पड़ा है। इसी क्षेत्र मझगंवा निवासी पीतांबर की पत्नी विशुनादेई बताती हैं कि चार माह पहले जो सिलेंडर मिला था वही अभी खत्म नहीं हुआ है। सिलेंडर कई महीनों तक चले इसलिए उसका प्रयोग कम से कम किया जाता है। यदि बहुत जरूरी होता है तभी सिलेंडर से खाना बनाया जाता है।
वर्जन
वर्ष 2011 में सामाजिक व आर्थिक जनगणना में जिसका नाम दर्ज होगा उसे उज्ज्वला योजना का लाभ दिया जाना है। पात्रों के नामों का चयन कर सूची गैस एजेंसियों पर भेज दी गई। जिले में करीब 44 गैस एजेंसियां हैं और इनके माध्यम से दो लाख से ज्यादा परिवारों को गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इनमे चूल्हे के 950 रुपए का लोन दिया जाता है। जिसकी वसूली रीफलिंग के समय मिलने वाली सब्सिडी से होनी है।
-संतोष विक्रम शाही, जिला आपूर्ति अधिकारी
वर्जन
जिले में 44 गैस एजेंसियों के माध्यम से उज्जवला योजना के तहत करीब 65 हजार परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं। एजेंसी संचालक प्रत्येक माह इनके गांवों को गैस सिलेंडर भिजवाते हैं। इनमें से पचास प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जिन्होंने दोबारा गैस लिया है। संचालकों ने बताया कि ज्यादातर कनेक्शन धारक पैसा न होने की बात कहकर सिलेंडर लेने से मना कर देते हैं।
-शिवकरन सिंह, संरक्षक एलपीजी एसोशियसन