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विद्यालयों के खातों में डंप पड़ा एमडीएम का साढ़े 28 करोड़

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बाराबंकी। मध्याह्न भोजन योजना का पैसा शासन स्तर से तो भेज दिया गया लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से यह बच्चों के खाते में भेजने के बजाए विद्यालयों के खातों में डंप पड़ा हुआ है। अब जब मामला प्रकाश में आया है तो बचाव में अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि कोरोना की वजह से पैसा खातों में नहीं भेजा जा सका। इसे भेजने की प्रक्रिया अब शुरू कर दी गई है।
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जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2751 के आसपास है लेकिन इनमें पढ़ने वाले बच्चों के खाते में अभी तक एमडीएम का पैसा नहीं भेजा जा सका है जबकि जिम्मेदार इसका कोई सही जवाब नहीं दे पा रहे हैं। विभाग के अनुसार परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों की संख्या करीब 3.74 लाख के करीब है। मध्याह्न भोजन के मद में करीब 28 करोड़ 45 लाख रुपया विभाग को मार्च में प्राप्त हुआ।
विभाग का कहना है कि शासन से धनराशि मिलने के बाद इसे तत्काल विद्यालयों के खातों में भेज दिया गया लेकिन इसी बीच पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की वजह से ये पैसा बच्चों के खाते में नहीं भेजा जा सका। इस वजह से करीब साढ़े 28 करोड़ रुपये की धनराशि विद्यालयों के खाते में डंप पड़ी हुई है। यह रकम बच्चों के खाते में कब तक जाएगी, इसका जवाब देने के लिए कोई तैयार नहीं है।
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विभाग के अनुसार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के खाते में एमडीएम का पैसा पिछले साल सितंबर से अभी तक नहीं भेजा जा सका है क्योंकि सितंबर से फरवरी का पैसा विभाग को मार्च में प्राप्त हुआ है। इसी बीच कोरोना संकट और पंचायत चुनाव के कारण पैसा बच्चों के खाते में नहीं भेजा गया। इसी वजह से ये पैसा विद्यालयों के खातों में पड़ा हुआ है।
डीआईओएस राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि मध्याह्न भोजन का पैसा कोरोना कॉल की वजह से बच्चों के खातों में नहीं भेजा जा सका था लेकिन अब प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बच्चों के खातों में धनराशि भेजने का कार्य तेजी से चल रहा है। इस संबंध में सभी बीईओ को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं।
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