बाराबंकी। लखनऊ, बाराबंकी समेत छह जिलों को मिलाकर बनाए जा रहे राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के तहत प्रस्तावित आउटर रिंग रोड से शहर का सीधा जुड़ाव होगा। पांच हाईवे वाले बाराबंकी जिले में एससीआर में शामिल छह जिलों को जोड़ने केे लिए प्रस्तावित आउटर रिंग रोड का करीब 20 से 25 किलोमीटर हिस्सा आने की उम्मीद है। इसके साथ ही कार्ययोजना में लखनऊ से बाराबंकी तक 14 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल रूट भी प्रस्तावित किया गया है।
राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) में लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई और बाराबंकी को एक ही सड़क से जोड़ने की योजना है। एससीआर के लिए शासन ने 300 किमी लंबा आउटर रिंग रोड प्रस्तावित किया है। प्रस्तावित रिंग रोड बाराबंकी से गुजरे पूर्चांचल एक्सप्रेस, लखनऊ-अयोध्या हाईवे से जुड़ने के साथ ही बाराबंकी के लोगों को आगरा एक्सप्रेसवे से भी सीधे जोड़ेगा। जिले के लोग राजधानी लखनऊ में प्रवेश किए बिना अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
किसान पथ की तर्ज पर होगा निर्माण
यह आउटर रिंग सड़क किसान पथ की तर्ज पर डिजाइन की जाएगी और लखनऊ से 15-20 किलोमीटर की दूरी पर बनाई जाएगी. यह सड़क एससीआर में शामिल सभी छह जिलों को एक सर्कुलर नेटवर्क में जोड़ेगी। इससे जाम मुक्त यात्रा के साथ समय की भी बचत होगी।
अनौरा कला तक होगा मेट्रो का विस्तार
एससीआर के तहत बाराबंकी को राजधानी लखनऊ से सीधे जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने लखनऊ से बाराबंकी की ओर अनौरा कला तक 14 किमी लंबा मेट्रो ट्रैक का प्रस्ताव भी तैयार किया है। इसका सीधा फायदा जिले के 40 लाख लोगों को मिलेगा। इसके लिए रूट सर्वे का काम भी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की तरफ से कराया जा रहा है।
आवासीय और औद्योगिक विकास की उम्मीद
विशेषज्ञों की मानें तो एससीआर योजना लागू होने के बाद बाराबंकी के आसपास के क्षेत्रों में भूमि की कीमतों में बढ़ोत्तरी के साथ पूरा इलाके व्यवसायिक हब में तब्दील हो जाएगा। इससे जिले के लोगों को नए रोजगार सृजन के नए अवसर मिलने से ग्रामीण-शहरी संतुलन में भी बड़ा बदलाव आएगा। खासतौर पर लखनऊ से सटे जिले के पश्चिमी क्षेत्र में आवासीय और औद्योगिक विकास के नए आयाम खुलेंगे।
यह एक बड़ी कवायद है जो जिले में विकास का खाका खींचेगी। एससीआर को लेकर राजधानी लखनऊ से ही सारी प्रक्रिया चल रही है। इसके वजूद में आने से कृषि प्रधान जिले बाराबंकी को स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ भी मिलेगा।
- शशांक त्रिपाठी, डीएम