बाराबंकी। बिना फिटनेस के सड़कों पर फर्राटा भर रहे ई रिक्शा चालकों को न तो कार्रवाई का डर है आर न ही यात्रियों की सुरक्षा की चिंता। पूरी तरह खटारा हो जाने के बाद भी सवारियां ढो रहे इन ई रिक्शा की धरपकड़ को लेकर जिम्मेदार भी पूरी तरह उदासीन हैं।
ई रिक्शा के लिए रजिस्ट्रेशन के समय से दो साल तक फिटनेस जांच की जरूरत नहीं होती है। इसके बाद हर साल इसकी फिटनेस जांच कराना पड़ती है। ऐसे में एआरटीओ में दर्ज ई रिक्शा संचालक शुरूआत में दो साल का फिटनेस प्रमाण पत्र लेने के बाद फिटनेस को लेकर पूरी तरह उदासीन बन जाते हैं। वर्तमान में शहर में करीब 2200 ई रिक्शा बिना फिटनेस के यात्रियों की जान जोखिम में डाल कर सड़कों पर सवारियां ढो रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय में करीब 6500 ई रिक्शा पंजीकृत हैं। इनमें से 22 सौ ई रिक्शों की फिटनेस खत्म हो चुकी है। खटारा स्थिति में दौड़ रहे यह ई रिक्शा सवारियों के लिए जानलेवा तक साबित हो रहे हैं। इनकी फिटनेस जांच के लिए एआरटीओ के पास कोई अतिरिक्त व्यवस्था व इंतजाम भी नहीं है। इसी का फायदा उठाकर ई रिक्शा चालक दो साल की फिटनेस पर पांच वर्ष से अधिक पुराने ई रिक्शा सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। इनमें से कई ई रिक्शा में तो आगे का शीशा तक गायब है।
फिटनेस जांच के लिए चलेगा अभियान
खरीद के दो साल बाद भी करीब 2200 ई रिक्शा स्वामी फिटनेस कराने नहीं आए हैं। विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी की गई है। जल्द ही ई रिक्शा की फिटनेस जांच के लिए अभियान भी संचालित किया जाएगा। इस दौरान बिना फिटनेस के दौड़ रहे ई रिक्शा को सीज करने के साथ संचालक से जुर्माना वसूलने की कार्रवाई भी होगी।
अंकिता शुक्ला, एआरटीओ