29 कॉलेजों में नहीं हो सकी प्रयोगात्मक परीक्षा
बाराबंकी। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। छात्रों को लैब में प्रैक्टिकल कराने के बजाए कुछ पैसे देकर अच्छे नंबर दिलाने का खेल होता है।
हाल ही में छात्रों से प्रैक्टिकल एग्जाम के नाम पर धन उगाही करने का वीडियो वायरल होने पर इसका खुलासा हुआ था। छूटे छात्रों की प्रयोगात्मक परीक्षा कराने के लिए विभाग ने बोर्ड को चिट्ठी भेजकर एक और मौका मांगा है।
जिले में माध्यमिक शिक्षा के 296 राजकीय, एडेड व वित्तविहीन कॉलेज संचालित हैं। इनमें हाईस्कूल के 41949 और इंटरमीडिएट के 28997 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। हरख के जनपद इंटर कॉलेज और सेमरावां के सतगुरु इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान विषय समेत जिले के 29 कॉलेजों में प्रयोगात्मक परीक्षा नहीं हुई है।
जिसकी रिपोर्ट डीआईओएस ने तीन जनवरी को अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजी थी। शहर के जीआईसी के फिजिक्स शिक्षक अरविंद प्रकाश त्रिपाठी बताते हैं कि 15-29 दिसंबर को जौनपुर से आए परीक्षक हरिओम यादव ने 176 छात्रों की परीक्षा कराई, इसमें छह छात्र अनुपस्थित थे। दूसरे फेज में 10-13 जनवरी हुई प्रयोगात्मक परीक्षा में शिक्षक सुशील द्विवेदी द्वारा 173 छात्रों की परीक्षा कराई गई।
इस परीक्षा में मिर्जापुर से आए परीक्षक भूनेश्वर प्रसाद पांडेय ने छात्रों से सवाल-जवाब पूछे थे। परीक्षक ने क्या सवाल पूछे, ये तो न शिक्षक बता पाए और न ही छात्र। छात्र विपिन, आयुष और शैलेश बताते हैं कि लैब में छात्रों का कभी प्रैक्टिकल कराया ही नहीं गया।
इसी तरह कोटवाधाम विद्यापीठ इंटर कॉलेज के जीव विज्ञान शिक्षक रमेश सिंह ने बताया कि जौनपुर से आई परीक्षक रीता सिंह ने प्रैक्टिकल कराया था। छात्र विनीत और प्रीतम से परीक्षक ने क्या सवाल किए ये पूछा गया तो छात्र से लेकर शिक्षक तक बगले झांकने लगे।
डीआईओएस राजकुमार ने बताया कि 29 कॉलेजों के छात्रों की प्रयोगात्मक परीक्षा नहीं हो सकी है। इसकी रिपोर्ट अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजी है। बोर्ड परीक्षा के बाद छूटे परीक्षार्थियों को बोर्ड द्वारा एक मौका और दिया जाएगा। जिन स्कूलों में लैब अव्यवस्थित खराब हैं, वहां दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।