बाराबंकी। अस्पतालों से निकलने वाले घातक कचरे के प्रबंधन के लिए प्लांट लगा है, कार्यदार्यी संस्था नामित है, उसके बाद भी अस्पतालों में खुले में कचरा डाला जा रहा है। इस ओर न अस्पताल प्रशासन ध्यान दे रहा और ही कंपनी के कर्मचारी। आलम यह है कि दुर्गंध से अस्पताल आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी इसका जिले में असर दिखाई नहीं पड़ा।
जिला मुख्यालय पर पुरुष व महिला अस्पताल के साथ ही क्षेत्र में 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके साथ ही 101 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। सभी अस्पतालों से निकलने वाले घातक कचरे से मरीजों व उनके तीमारदारों को बचाने के लिए सिनर्जी बेस्ट मैनेजमेंट संस्थान को कचरा उठाने के लिए अधिकृत किया गया है। जिला अस्पताल से प्रतिदिन मरीजों की आमद के हिसाब से 40-45 किलो घातक कचरा निकलता है। अस्पतालों में कचरे के हिसाब से रखी बाल्टियों में कचरा एकत्र करने के बाद उसे बंद स्थान पर इकट्ठा करने के नाम पर उसे खुले में डाला जा रहा है। संस्था द्वारा रोजाना कचरे को बंद वाहन में प्लांट ले जाकर नष्ट करना चाहिए, कचरा उठाने वाले कभी कभार आकर अपना कोरम पूरा करते हैं। खुले में पड़ा कचरा मरीजों व तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सीएचसी पीएचसी समेत नर्सिंग होम के आस पास खाली पड़ी जमीनों पर खुले में मेडिकल कचरा पड़ा रहता है।
महिला अस्पताल में कचरा पटा पड़ा
महिला अस्पताल में कूड़ा एकत्र करने का स्थान है, उसके बाद भी खून से लथपथ कपड़े, ग्लूकोज की बोतले, सिरिंज समेत अस्पताली कचरा वार्ड के पीछे व इमरजेंसी के पीछे पड़ा मिला। गंदगी की बदबू से मरीज व तीमारदार काफी परेशान थे। महिला अस्पताल में साफ सफाई न होने से संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। सीएमएस रवि चंद्र किशोर का कहना है कि कचरा प्रबंधन के कर्मचारी जब ज्यादा कचरा एकत्र हो जाता है तो वैन से ले जाते हैं।
जिला पुरुष अस्पताल में भी लगा कूड़े का ढेर
जिला पुरुष अस्पताल में अलग अलग स्थानों पर अस्पताली कचरा पड़ा मिला। ओटी के सामने लैय्या मंडी मार्ग पर कचरा एकत्र करने के लिए एक पक्की कोठरी बनी है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से अस्पताली कचना कर्मचारी आवास के सामने एकत्र किया जाता है। रास्ते में खुले स्थान पर पड़ा यह कचरा कर्मचारी आवास में रहने वालों के लिए मुसीबत बना हुआ है। अक्सर कचरे को जलाकर वहीं नष्ट किया जाता है। जिससे कर्मचारियों के साथ राहगीरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्लास्टर वार्ड के पीछे भी मेडिकल कचरा डाल दिया जाता है।
अस्पतालों से निकलने वाले घातक कचरे के प्रबंधन के लिए सिनर्जी बेस्ट मैनेजमेंट कंपनी को कचरा उठाने का ठेका है। जो प्रतिदिन अस्पतालों से कचरा उठाकर हड़ियाकोल स्थित प्लांट में जलाकर नष्ट करती है। अस्पतालों में अलग अलग कचरे के हिसाब से लाल, पीली व नीले रंग की बॉकेट रखी हैं। - डॉ. रमेश चंद्र, सीएमओ