बाराबंकी। घाघरा का ताड़व थमने का नाम नही ले रहा है। शुक्रवार को बनबसा से दो लाख 56 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा खतरे के निशान से 17 सेमी ऊपर पहले से ही बह रही है। जिले के एक दर्जन गांव के 32 सौ परिवार एक महीने से खुले आसमान के नीचे किसी तरह जीवन काट रहे हैं।
करीब एक माह से बारिश और नेपाली पानी छोड़े जाने से घाघरा तराई के गांवों में तबाही मचा रही है। एल्गिन चरसड़ी बांध कटने की वजह से नदी के उस पार गोंड़ा जिले के किनारे बसे सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट के 11 गांव रायुपर मांझा, बेहटा, चरपुरवा, नाउनपुरवा, नयापुरवा, परसावल,नैपुरा, कमियार, गुनौली, कोयलावर, गढ़ी गांव के करीब 32 सौ परिवार घरों में पानी भर जाने के कारण घर बार छोड़ कर बाहर तटबंधों पर गुजर बसर कर रहे हैं। लगातार उतार चढ़ाव के चलते बाढ़ पीड़ितों की मुसिबतें कम होने का नाम नही ले रही हैं। आठ जुलाई से इन गांवों के वाशिंदों का हालचाल लेने के लिए प्रदेश सरकार के मंत्री स्वाती सिंह क्षेत्रीय विधायक के अलावा प्रमुख सचिव सिंचाई, बाढ़ व जिलाधिकारी कई बार यहां का जायजा ले चुके हैं। एसडीएम रामनगर ने बताया कि पानी भरने के कारण तहसील क्षेत्र के तीन गांव में नावें उपलब्ध कराकर लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर लाने के लिए कहा गया है। उधर सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के तबाही वाले गांव में दो बार राहत सामग्री बांटने का दावा प्रशासन द्वारा किया गया है। लेकिन यह मदद उनके लिए सिर्फ ऊंट के मुंह का जीरा साबित हुई है। प्रधानों व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा इन्हें राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
शुक्रवार को एल्गिनब्रिज पर घाघरा का जलस्तर 106.246 रहा। जो खतरे के निशान से 17 सेंटी ऊपर रहा। घाघरा में नेपाल से फिर 2लाख 60 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसके कल तक पहुंचने पर जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। -अनिल कुमार सिंह एडीएम