एनजीटी की एनओसी में
फंसे बालू खनन के पट्टे
क्रासर
- तीन माह में अवैध खनन में लगे 41 वाहनों से वसूला 9.17 लाख
- खनन माफिया चिह्नित नहीं पर जिले में फैला अवैध खनन का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। जिले में एनजीटी द्वारा एनओसी न दिए जाने से बालू खनन के पांच पट्टों का आवंटन अधर में लटका है। मौजूदा समय निजी भूमि पर किसानों को ही पट्टा आवंटित किए गए हैं। उसके बाद भी जिले में हो रहे अवैध बालू खनन की चुगली विभागीय कार्रवाई अलग ही हकीकत बयां कर रही है। मगर, खनन माफियाओं के आगे प्रशासन बेबस नजर आ रहा है। यह हाल तब है जब बरसात के दिनों में 30 जून से लेकर 30 सितम्बर तक तीन माह के लिए बालू खनन पर पूरी तरह से पाबंदी रहती है। गोंडा जिले में एनजीटी के बड़े फैसले के बाद खनन माफियों में हड़कंप मच गया है।
जिले में घाघरा व गोमती नदी पर बालू खनन के पट्टा आवंटन कें पांच मामले लंबित है। तपेसिपाह, उधिया व पत्रा तो गोमती नदी पर झीझांमऊ व करीमाबाद मलौली में पट्टे आवंटित किए गए थे। इससे विभाग को 80 करोड़ रूपये का राजस्व मिलना था। मगर, पर्यावरण की एनओसी न मिलने से यह पट्टे अभी तक शुरू नही हो सके। ऐसे में खनन का करोबार बंद देख खनन माफियाओं ने किसानों की निजी भूमि पर दिए गए पांच पट्टे अपने शिंकजे में ले लिए जिस पर रोक के बाद भी मशीनों से खनन किया गया। मामला सुर्खियों में आने के बाद जिम्मेदारों ने एक मशीन को पकड़ कर कार्रवाई भी। उसके बाद भी खनन माफियाओं के हौसले बुलंद रहे क्योंकि एक भी माफिया चिह्नित नहीं किया गया है।
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घाघरा-गोमती में चल रहा खनन
घाघरा व गोमती नदी में विभाग व स्थानीय पुलिस की सांठ-गांठ से खनन माफियाओं का कारोबार फलफूल रहा है। ऐसे में अफसरों के दौरे के दौरान रास्ते में मिलने नजर आ गए वाहनों कों बद करने की कार्रवाई तक सीमित है। हाल में ही डीएम के निरीक्षण के दौरान बालू लदी ट्रक पलटी गई तो एसडीएम सिरौली व रामनगर ने भी रास्ते में वाहन मिलने पर बंद कराने की कार्रवाई की। मगर, इसके बाद भी खनन माफिया सक्रिय रहे।
वर्जन
जिले में मौजूदा समय में एक भी बालू खनन का पट्टा आवंटित नही है। पर्यावरण की एनओसी ने मिलने से घाघरा व गोमती नदी के पांच स्थलों पर होने वाले पट्टों का आवंटन अधर में है। वहीं किसानों को दिए गए पट्टे भी तीन माह के लिए बंद करा दिए गए है। हालांकि तीन माह में हुई अवैध खनन को लेकर कार्रवाई की बात करे तो अवैध खनन में लगे 41 वाहनों को बंद कराने के साथ नौ लाख 17 हजार रुपये का राजस्व वसूला गया।
लालता प्रसाद,
जिला खनन अधिकारी, बाराबंकी।