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तीन साल में दोगुने हो गए केरोसीन के दाम

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बाराबंकी। केरोसिन के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है। पिछले पांच सालों में केरोसिन के दाम दोगुने हो गए हैं। वहीं केरोसिन के दामों में बढ़ोत्तरी का सिलसिला अभी भी जारी है। जिससे सबसे अधिक दिक्कते गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को हो रहीं है जो इतने महंगे दामों पर केरोसिन खरीदने को मजबूर हैं।
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जिले में गरीबी रेखा से जीवनयापन करने वाले परिवारों की संख्या 1 लाख 18 हजार के आसपास है। इन्हें प्रति कार्ड प्रतिमाह तीन लीटर केरोसिन दिया जाता है। कोई कोटेदार इनसे 33 रुपये तो कोई 35 रुपये प्रति लीटर की दर से वसूल रहा है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि कंपनियां प्रतिमाह केरोसिन के दाम बढ़ा रही है। इसी वजह से केरोसिन के दामों में हर माह बढ़ोत्तरी हो रही है। देखा जाए तो पिछले पांच सालों में केरोसिन के दाम दोगुने तक पहुंच गए हैं। वर्ष 2016 में केरोसिन के दाम 16.15 पैसे प्रति लीटर थे।

वर्ष 2017 में 19.75 पैसे हो गए इसके बाद वर्ष 2018 में यह दाम 23 रुपये 15 पैसे के आसपास पहुंच गए। जबकि वर्ष 2019 में यह दाम 31.90 पैसे प्रति लीटर के आसपास पहुंच गए हैं। सूत्रों की माने तो केरोसिन के दामों में प्रतिमाह करीब 50 पैसे प्रतिलीटर की दर से बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे सबसे ज्यादा दिक्कतें उन गरीब परिवारों को हो रही है जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। महंगे दामों पर केरोसिन की खरीद करना इनकी मजबूरी बनता जा रहा है। लेकिन शासन से लेकर प्रशासन तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है जिससे इन गरीब परिवारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जिला आपूर्ति अधिकारी संतोष विक्रम शाही ने कहा कि केरोसिन के दाम तेल कंपनियां निर्धारित करती है। विभाग की जिम्मेदारी है कि जो दर निर्धारित है उससे ज्यादा पर इसकी बिक्री न हो। कंपनियां हर माह करीब 50 पैसे प्रति लीटर की दर से केरोसिन के दाम बढ़ा रही हैं। जिससे केरोसिन के दामों में लगातार वृद्वि होती जा रही है।
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