महानिदेशक प्रशिक्षण को निरीक्षण में 67 प्रकार की दवाएं मिली नदारद
बाराबंकी। महानिदेशक प्रशिक्षण अनीता भटनागर जैन के निरीक्षण में जिला अस्पताल में दवाओं का टोटा पाया गया। दो माह से नेत्र जांच मशीन खराब मिली, तो आदेश के बावजूद भी दवाओं की लोकल पर्चेजिंग न होने की बात सामने आई।
उन्होंने सख्त निर्देश दिया कि दवाओं की उपलब्धता पूरी कराएं जिससे मरीजों को कोई दिक्कत न हो। उन्होंने निरीक्षण के दौरान कहा कि पहली बार यहां सिर्फ समस्याओं को जानने आई हूं, जो भी समस्याएं मिली हैं उन्हें जल्द दूर कराया जाएगा।
महानिदेशक प्रशिक्षण निरीक्षण के दौरान सबसे पहले कक्ष संख्या-11 पहुंची जहां पर्चा बनाने के लिए लंबी लाइन लगी थी। मरीजों से पर्चा का शुल्क पूछ आगे बढ़ गईं। नाक, कान व गला की ओपीडी में मौजूद डॉ. हनफी से मरीजों की दी जाने वाली सुविधाएं जानी।
एक्स-रे रूम के बाहर बैठी कुंता देवी व सीताराम से पूछा दवाएं मिलती हैं, जवाब मिला चार दवा लिखी जिसमें एक नहीं मिली। दो घंटे से अल्ट्रासाउंड के लिए बैठे होने की बात मरीज ने कही। एक्स-रे रिकार्ड चेक करने पर पता चला कि जहां 25-30 एक्स-रे होने चाहिए वहां पर 115 हो चुके थे।
महानिदेशक प्रशिक्षण से रामनगर के निवासी एक मरीज ने कहा कि उसे एड्स है और उसे बलगम जांच के लिए दौड़ाया जा रहा है। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक को तत्काल जांच कराने के आदेश दिए। दवा भंडार कक्ष में स्टॉक रजिस्टर पर दवाओं की स्थित संतोष जनक नहीं थी।
बताया गया कि 4 अगस्त को 88 प्रकार की दवाओं के आर्डर किए गए थे, जिनमें से 67 प्रकार की दवाओं की आपूर्ति नहीं हो सकी है। इतनी भारी संख्या में दवाओं की कमी देख कहा कैसे इलाज करते हो, जुलाई में लोकल पर्चेज के आदेश के बाद भी अब तक क्यों खरीद नहीं हो सकी। प्रमुख सचिव को तेवर में देख अस्पताल प्रशासन चुप हो गया।
नेत्र जांच मशीन दो माह से खराब होने पर उसकी जानकारी डीजी स्वास्थ्य को देकर जल्द ही दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। इसके बाद ट्रॉमा सेंटर, जेई व इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों से मिलनी वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।