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17 सौ विद्यालयों का नहीं हुआ कायाकल्प

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बाराबंकी। कायाकल्प योजना के तहत भले ही विद्यालयों की सूरत बदलने का प्रयास किया गया हो लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते यह योजना परवान चढ़ती दिखाई नहीं दे रही है। अभी भी जिले के करीब 17 सौ से ज्यादा विद्यालय ऐसे हैं जिनमें कायाकल्प योजना की लौ नहीं पहुंच सकी है। जिम्मेदारों द्वारा ध्यान न दिए जाने से योजना के तहत कराए जाने वाले काम पूरी तरह बंद पड़े हैं।
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जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या करीब 2636 के आसपास है लेकिन इनमें से अभी तक महज 894 विद्यालयों में ही कायाकल्प योजना के तहत काम कराए जा सके हैं। काम न हो पाने की प्रमुख वजह कोरोना और पंचायत चुनाव बताई जा रही है। देखा जाए तो कोरोना के चलते लंबे समय से विद्यालय बंद चल रहे हैं जिससे ज्यादातर विद्यालय में योजना के तहत काम नहीं कराए जा सके हैं।
इसी बीच बीएसए की कुर्सी करीब छह माह तक प्रभारी के सहारे रही ऐसे में भी जिम्मेदारों ने इस दिशा में ध्यान देने का कोई प्रयास ही नहीं किया। अब चूंकि पहली जुलाई से विद्यालय फिर से खुल चुके हैं व बच्चे भले ही विद्यालय न आ रहे हों लेकिन शिक्षक विद्यालय में साफ-सफाई के अलावा अन्य अधूरे पड़े काम पूरा करा रहे हैं।
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इन सबके बावजूद जिले में अभी भी करीब 1742 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें कायाकल्प योजना के तहत काम कराए जाने की आवश्यकता है लेकिन जिम्मेदारों द्वारा ध्यान न दिए जाने से योजना के तहत कराए जाने वाले काम पूरी तरह ठप पड़े हैं।
बीएसए अजय कुमार सिंह ने बताया कि कोविड और पंचायत चुनाव की वजह से कायाकल्प योजना के तहत कराए जाने वाले काम नहीं हो पा रहे थे। अब चूंकि कोरोना के केस कम पड़ गए हैं, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, विद्यालय भी खुल चुुके हैं तो ऐसे में जहां पर भी योजना के तहत काम कराए जाने हैं, जल्द से जल्द शुरू करा दिए जाएंगे।
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