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Barabanki News: हर साल बाढ़ से घिरते हैं 150 गांव, करोड़ों पी रहे तटबंध

Thu, 18 Jun 2026 12:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। जिले से गुजरने वाली सरयू नदी हर साल मानसून में तबाही का कारण बन रही है। गोंडा और बहराइच की सीमा से सटी यह नदी रामनगर, सिरौली गौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्रों के करीब 150 गांवों को प्रभावित करती है। इनमें से करीब 50 गांव ऐसे हैं, जो जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाते ही सीधे बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। बाढ़ अब बड़ी चुनौती बन चुकी है लेकिन इसका स्थायी हल नहीं निकल सका है।
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बीते 25 सालों में नदी के कटान और गांवाें को बाढ़ से बचाने के लिए बाराबंकी के साथ सीतापुर, गोंडा व बहराइच की सीमा तक तीन बड़े तटबंध बनाए गए थे। इनमें 54.6 किमी लंबा गणेशपुर–चलहारीघाट तटबंध, 28.240 किमी लंबा अलीपुर–रानीमऊ तटबंध और 52.400 किमी लंबा एल्गिन–चरसड़ी तटबंध।
इन तटबंधों की मरम्मत और रखरखाव पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन नदी की तेज धारा के आगे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ती जा रही है। करीब 54 किलोमीटर लंबे गणेशपुर–चलहारीघाट तटबंध पर वर्ष 2024 में किमी 42.025, 42.250 और 42.500 पर तीन स्परों का निर्माण 9.41 करोड़ रुपये से कराया गया था।
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बावजूद इसके, तटबंध फिर कमजोर हो गया है। सर्वे के बाद अब इस बांध के किमी 42.025, 42.250 और 42.500 पर नौ करोड़ 41 लाख रुपये से तीन नए स्परों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा इस तटबंध के किमी 24.950 पर गोबरहिया नाला रेगुलेटर निर्माण को भी मंजूरी मिली है, जिस पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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13,964 हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ की चपेट में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष लगभग 13,964 हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आता है, जिसमें 4,452 हेक्टेयर कृषि भूमि शामिल है। इसमें रामसनेहीघाट तहसील 8,639 हेक्टेयर, सिरौलीगौसपुर 3,587 हेक्टेयर और रामनगर तहसील के 1738 हेक्टेयर क्षेत्रफल शामिल होता है।
टेपरा, सनावा, सराय सुर्जन, भवरीकोल, नैपुरा, परसावल, बेहटा, ढेमा, बांसगांव, कमियार, तपेसिपाह, कोरिनपुरवा, जैनपुरवा, मड्ना, कचनापुर, हेतमापुर और सुंदरनगर जैसे गांव हर साल बाढ़ के खतरे की जद में रहते हैं।
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टूटे बांध...2024 की बाढ़ ने मिटा दिए तीन गांव
2016 में एल्गिनब्रिज–चरसड़ी तटबंध नकहरा में टूटा था। करीब आठ गांव प्रभावित हुए थे। वर्ष 2017 में कमियार के पास बांध कटने से पांच गांव जलमग्न हो गए थे। कई हिस्से अब भी बेहद संवेदनशील हैं। इनमें बांध के किमी नौ से 15, 27 से 29 और 36.200 से 36.500 की निगरानी हो रही है। सितंबर 2024 में रामनगर क्षेत्र के बेलहरी, केदारीपुर और भिखारीपुरवा गांवों का अस्तित्व ही खत्म हो गया।
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