बारिश के पानी को सजेहने के तरीके बताए
क्रासर
- संगोष्ठी में दी गई भू-जल संरक्षण की जानकारी
पटेल महिला डिग्री कॉलेज में हुआ कार्यक्रम
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अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। हम किसी से कुछ लेते हैं तो इतना न लें कि उसके पास देने के लिए कुछ न बचे। ठीक यही बात जल पर भी लागू होती है। हमारी पृथ्वी पर जितना जल है उसका हम सदुपयोग करें, दुरुपयोग न करें।
यह बात मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला महाविद्यालय में आयोजित ‘भू-जल संरक्षण’ की जागरूकता संगोष्ठी के अवसर पर पर्यावरण विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. कौशल किशोर सिंह ने स्वयंसेविकाओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से जल संरक्षण के तरीके बताते हुए कहा कि जल संरक्षण की अनेक विधियां हैं। इससे हम बारिश के जल को संरक्षित कर सकते हैं और उसे पौधों को सींचने, गाड़ी धुलने आदि में प्रयोग कर सकते हैं। इस दौरान सरकार की भू-जल संरक्षण से संबंधित चलायी जा रही योजनाओं के बारे में भी स्वयंसेविकाओं को अवगत कराया।
भूगोल विभाग की प्रवक्ता डॉ. रेणुका चौधरी ने कहा कि हम और हमारे पूर्वज आदिकाल से ही संकट आने पर भगवान का स्मरण करते हैं। भगवान में वहीं पांच तत्व समाहित हैं जो हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। उसमें से जल भी एक तत्व है। इसलिए हमें अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए जल का संरक्षण करना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. रचना श्रीवास्तव ने बताया कि जिस प्रकार से बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। उसी प्रकार से हमें अपने दैनिक जीवन में जल का दुरुपयोग न करने का संकल्प लेना चाहिए तभी भविष्य में हम अपने जीवन को सुरक्षित रख पाएंगे। इस मौके पर पूर्व कार्यक्रमाधिकारी मोनिका तिवारी ने उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई। इस मौके पर कु.अंजली, कु. नशरा, कु. आकांक्षा, कु. खुशनुमा सदफ सहित विद्यालय की छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।