बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल इस समय डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बेहोशी के डॉक्टर को भी ऑनकॉल (जरूरत पड़ने पर) बुलाना पड़ता है। कई बार डॉक्टरों के समय पर न पहुंचने के कारण प्रसूताओं की जान जोखिम में पड़ जाती है। चिकित्सकों की इस गंभीर समस्या के चलते समय पर इलाज न मिलने की वजह से कभी-कभार गर्भवती महिलाओं को रेफर का पर्चा थमा दिया जाता है, लेकिन इस समस्या का कोई स्थायी हल नहीं निकल पाया है।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 प्रसूताएं इलाज के लिए आती हैं। यहां रोजाना औसतन 15 से 20 सिजेरियन (ऑपरेशन) और 10 से 12 सामान्य प्रसव होते हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के 18 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल सात चिकित्सकों की तैनाती है। देखा जाए तो इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) के छह, बेहोशी के तीन, रेडियोलॉजिस्ट का एक और चिकित्सा अधीक्षक का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है, जिन पर अब तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी है। हाल ही में बेहोशी के दो चिकित्सकों की तैनाती हुई थी, लेकिन वे आज तक अस्पताल नहीं पहुंचे हैं। इसी कारण यहां दो बेहोशी के डॉक्टरों को ऑनकॉल रखा गया है। लेकिन इनके भी कभी-कभार समय से न पहुंचने की वजह से प्रसूताओं के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। इस समस्या का समाधान न होने से सबसे अधिक दिक्कतें प्रसूताओं को ही उठानी पड़ रही हैं।
बाक्स
सीएचसी पर भी चिकित्सकों का संकट
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। जिले में चिकित्सकों के 206 पद स्वीकृत हैं, जबकि इसके सापेक्ष केवल 168 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। डॉक्टरों की इस कमी के कारण सीएचसी पर आने वाले मरीजों, विशेषकर प्रसूताओं को अक्सर तत्काल रेफर का पर्चा थमा दिया जाता है। सबसे अधिक खराब स्थिति फर्स्ट रेफरल यूनिटों की है। जबकि ये यूनिटें विशेष रूप से प्रसूताओं को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए ही बनाई गई थीं, लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते इनका लाभ गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। इससे जिला महिला अस्पताल पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे वहां पहले से मौजूद डॉक्टरों की कमी और भी बड़ी चुनौती बन गई है।
वर्जन
जिला महिला अस्पताल में सबसे अधिक प्रसूताएं इलाज के लिए आती हैं। हालांकि, चिकित्सकों की कमी, विशेषकर बेहोशी (एनेस्थीसिया) और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) के पदों के रिक्त होने के कारण, समस्याएं हो रही हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन प्रसूताओं को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए पूरा प्रयास कर रहा है। चिकित्सकों की कमी के संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. प्रदीप कुमार, सीएमएस जिला महिला अस्पताल