फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रस्ताव पर मुहर लगी तो दूर होगा 12 गांवों का संकट

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रस्ताव पर मुहर लगी तो दूर होगा 12 गांवों का संकट
विज्ञापन



बाराबंकी। घाघरा नदी के उस पार और गोंडा जिले की सीमा से सटे 12 गांवों की 25 हजार आबादी को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। काफी लंबा चक्कर काटने के बाद यहां के पीड़ित न्याय पाने के लिए तहसीलों और थानों तक पहुंच पाते हैं।


वहीं, जिला मुख्यालय से दूरी अधिक होने के चलते बाढ़ आने पर न तो समय से बचाव कार्य हो पाता हैं और न ही सहायता पहुंच पाती है।


ऐसे में इन गांवों को गोंडा जिले में शामिल करने के प्रशासन के प्रस्ताव पर यदि शासन ने मुहर लगा दी तो यहां के लोगों का संकट दूर हो जाएगा। न्याय के साथ ही राहत भी आसानी से मिल सकेगी।
विज्ञापन



जिले की रामसनेहीघाट और सिरौलीगौसपुर तहसील के 12 गांवों के लोगों को यदि किसी कार्य से तहसील जाना होता है तो वे पहले 70 किमी की दूरी तय कर जिला मुख्यालय आते हैं और इसके बाद 40 किमी की दूरी तय कर रामसनेहीघाट तहसील पहुंचते हैं।


यही हाल इन गांवों के अंतर्गत थानों का है। यदि कोई घटना-दुर्घटना होती है तो पुलिस भी मदद को समय से नहीं पहुंच पाती है और न ही यहां के लोग थाने पहुंच पाते हैं।


इन गांवों को गोंडा जनपद में शामिल करने के लिए पूर्व में भी प्रस्ताव शासन को भेजे गए लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। एक बार फिर इन गांवों को गोंडा में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव देने को कहा है।


वहीं, इन गांवों को गैर जनपद में शामिल करने की सुगबुगाहट से कहीं विरोध तो कहीं निर्णय सही होने पर चर्चा शुरू हो गई है।


इस बारे में एसडीएम अजय द्विवेदी ने बताया कि, गांवों में बाढ़ राहत के साथ ही अन्य कार्य कराने में परेशानी उठानी पड़ती है। कई अन्य दुश्वारियां भी होती हैं। ऐसे में यदि शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो 12 गांवों के लोगों को काफी राहत मिलेगी।
विज्ञापन



जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने बताया कि, जिले के 12 गांवों को गोंडा में शामिल करने का प्रस्ताव वर्ष 2016 में भी शासन को भेजा गया था। सीएम के आदेश पर उसी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें